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| Case posted by | NCDHR- NDMJ, Himachal Pradesh |
| Case code | HP/06-09-2026 |
| Case year | 29-Aug-2026 |
| Type of atrocity | Abuses by caste name in any place within public view |
| Whether the case is being followed in the court or not? | No |
| Fact finding date | Not recorded |
| Case incident date | 29-Aug-2026 |
| Place | Village: Not recorded Taluka:Not recorded District: SIRMAUR(DP) State: Himachal Pradesh |
| Police station | PACHHAD |
| Complaint date | 29-Aug-2026 |
| FIR date | 29-Aug-2026 |
यह घटना जिला सिरमौर की तहसील पच्छाद के गांव मेहली के साथ बने नैना देवी मंदिर की है, जहां जल शक्ति विभाग (IPH) में कार्यरत 57 वर्षीय चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी (चपड़ासी/पंप ऑपरेटर) श्री बालाराम (सुपुत्र स्वर्गीय श्री नानकु राम, निवासी ग्राम मेहली, डाकघर नैना टिक्कर) के साथ मंदिर के पुजारी विक्रम ठाकुर (सुपुत्र श्री जोगिन्दर सिंह, निवासी ग्राम जुडव, डाकघर नैना टिक्कर) द्वारा गंभीर जातिगत दुर्व्यवहार, गाली-गलौज और प्राणघातक हमला किया गया। 29 अगस्त को विभागीय आदेशानुसार जल शक्ति विभाग के पानी के टैंक की सफाई का कार्य चल रहा था, जिसमें बालाराम जी अपने विभागीय सहकर्मियों हरीश ठाकुर और सुनील दत्त के साथ मौके पर तैनात थे। दोपहर करीब 12:00 से 12:15 बजे के बीच, जब वे सरकारी कार्य के तहत टैंक की सफाई कर रहे थे, तभी वहां मौजूद मंदिर के तथाकथित पुजारी विक्रम ठाकुर ने उन्हें देखते ही हीन भावना व जातिगत दुर्भावना के चलते भद्दी-भद्दी गालियां देना शुरू कर दिया। उसने अनुसूचित जाति से ताल्लुक रखने वाले बालाराम और सुनील के खिलाफ अपमानजनक व जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए कहा, "तू चमार तू यहां पर किसने बुलाया,तुझे तो मैं आज जान से मार दूंगा और काट के जोहड़ में फेंक दूंगा"। कर्मचारियों ने शांति बनाए रखने का प्रयास किया और अपने काम में लगे रहे, लेकिन कुछ ही मिनटों बाद जब बालाराम टैंक के स्लैब पर सफाई कर रहे थे, तभी आरोपी विक्रम ठाकुर ने पीछे से आकर उनके सिर पर जानलेवा नीयत से एक मोटे डंडे से अचानक जोरदार प्रहार कर दिया। इस हमले के कारण बालाराम सीधे नीचे गड्ढे में जा गिरे और उनके सिर से भारी मात्रा में खून बहने लगा। यदि मौके पर मौजूद हरीश ठाकुर और सुनील दत्त तुरंत बीच-बचाव कर हमलावर को न पकड़ते, तो वह दूसरा वार कर बालाराम की जान ही ले लेता। इस पूरे घटनाक्रम की प्रत्यक्षदर्शी पास में ही पशु चरा रही गांव की एक महिला श्रीमती सत्या देवी (पत्नी श्री सीता राम) भी थीं।
इस अत्यंत गंभीर और जानलेवा घटना में पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली बेहद लचर, पक्षपातपूर्ण और घोर चिंताजनक रही है। दोपहर लगभग 12:00 बजे सिर पर गंभीर चोट लगने और अत्यधिक रक्तस्राव होने के बावजूद पीड़ित बालाराम का प्राथमिक उपचार और मेडिकल परीक्षण शाम को करीब सवा 6 बजे जाकर कराया गया। लगभग 6-7 घंटे तक घायल पीड़ित को बिना किसी त्वरित चिकित्सीय सहायता और एफआईआर के थाने में बैठाए रखा गया। इसके अलावा, पच्छाद पुलिस थाना द्वारा दर्ज की गई एफआईआर में भी भारी लापरवाही बरती गई है। सरकारी ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी पर पीछे से सिर जैसे नाजुक अंग पर जानलेवा हमला किए जाने और खुलेआम जान से मारने की धमकी देने के स्पष्ट साक्ष्य होने के बावजूद पुलिस ने आरोपी पर हत्या के प्रयास (Attempt to Murder) जैसी गंभीर धाराएं नहीं लगाईं। साथ ही, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (SC/ST Act) के तहत जो सख्त व उचित धाराएं लगनी चाहिए थीं, उन्हें भी नजरअंदाज कर दिया गया और मामले को कमजोर करने का प्रयास किया गया। घटना के समय आरोपी के हाथों में दराट (तेजधार हथियार) होने और पहले भी ग्रामीणों व महिलाओं के साथ उसके द्वारा की गई बदसलूकी के इतिहास के बावजूद पुलिस की यह ढिलाई और विलंब कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। इस प्रकरण में उच्चाधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप कर मामले में धाराएं बढ़ाने, आरोपी की त्वरित गिरफ्तारी करने और पीड़ित को उचित मुआवजा व न्याय दिलाने की सख्त आवश्यकता है।