
SMS Help line to Address Violence Against Dalits and Adivasis in India
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| Case posted by | NCDHR- NDMJ, Himachal Pradesh |
| Case code | HP-14-12-2025 |
| Case year | 14-Aug-2025 |
| Type of atrocity | Rape |
| Whether the case is being followed in the court or not? | No |
| Fact finding date | Not recorded |
| Case incident date | 14-Aug-2025 |
| Place | Village: Not recorded Taluka:Not recorded District: KULLU(DP) State: Himachal Pradesh |
| Police station | BANJAR |
| Complaint date | 14-Aug-2026 |
| FIR date | 14-Aug-2026 |
यह घटना तहसील बंगाणा के गांव कोलका (रायेपुर मैदान) की है। इस गांव में यह अत्यंत दुखद और जघन्य घटना हिमाचल प्रदेश के जिला कुल्लू की सैंज घाटी की है, जहाँ एक दलित महिला युवावंती, जो समाज में स्वावलंबन की मिसाल पेश करते हुए अपने घर से लगभग दो-तीन किलोमीटर दूर दयोली गांव में अपना एक सिलाई केंद्र (Boutique) चलाती थीं, इस क्रूरता का शिकार हुईं। युवावंती रोज की तरह अपने सिलाई केंद्र पर काम खत्म करने के बाद शाम को पैदल ही जंगल के रास्ते से अपने घर लौट रही थीं, लेकिन उस दिन वह घर नहीं पहुँचीं। उनके पति रतिराम, जो एक दिहाड़ी मजदूर हैं, जब उनकी राह तकते-तकते थक गए और चिंता बढ़ी, तो उन्होंने ग्रामीणों के साथ मिलकर उस रास्ते पर खोजबीन शुरू की जहाँ से वह रोज गुजरती थीं। काफी तलाश के बाद जंगल के एकांत क्षेत्र में युवावंती का शव एक पेड़ से लटका हुआ मिला, जिसे देख पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। दरअसल, अपराधियों ने घात लगाकर उन्हें रास्ते में रोका, उनके साथ सामूहिक बलात्कार जैसी हैवानियत को अंजाम दिया और फिर उनकी नृशंस हत्या कर दी; साक्ष्य मिटाने और मामले को आत्महत्या का रूप देने के लिए उनके शव को पेड़ से टांग दिया गया था। रतिराम के अनुसार, उनकी पत्नी एक मेहनती महिला थीं जो अपने सिलाई के काम से परिवार की मदद कर रही थीं, लेकिन अपराधियों ने उनके इस संघर्षपूर्ण जीवन का अंत कर दिया। इस मामले में पुलिस जांच के दौरान पवन कुमार और संजय कुमार जैसे स्थानीय व्यक्तियों के नाम मुख्य दोषियों के रूप में सामने आए, जिन्हें बाद में गिरफ्तार भी किया गया। घटना के बाद स्थानीय लोगों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ कड़ा रोष प्रकट किया क्योंकि शुरुआत में मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया था। रतिराम जैसे एक साधारण मजदूर के लिए अपनी पत्नी के साथ हुई इस भयानक घटना की पूरी जानकारी दे पाना मानसिक रूप से बहुत कष्टदायक है, क्योंकि इस रास्ते पर गुजरते हुए आज भी उन्हें वह खौफनाक मंजर याद आता होगा। वर्तमान में यह मामला दलित उत्पीड़न और महिलाओं के खिलाफ हिंसा का एक गंभीर उदाहरण बन चुका है, जिसमें उचित कानूनी पैरवी और रतिराम को सुरक्षा प्रदान करना अत्यंत आवश्यक है ताकि आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा मिल सके।