दलित छात्रा के साथ जातिय भेदभाव, रैगिंग व छेड़छाड़ छात्रा की हुई मौत Tapovan (Code: HP-01-03-2026, Date: 26-Dec-2025 )

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Case Title

Case primary details

Case posted by NCDHR- NDMJ, Himachal Pradesh
Case code HP-01-03-2026
Case year 26-Dec-2025
Type of atrocity SC/ST (POA) Act
Whether the case is being followed in the court or not? Yes

Fact Finding

Fact finding date

Fact finding date Not recorded

Case Incident

Case Incident details

Case incident date 26-Dec-2025
Place Village: Not recorded
Taluka:Not recorded
District: KANGRA(DP)
State: Himachal Pradesh
Police station DHARAMSHALA
Complaint date 30-Dec-2025
FIR date 01-Jan-2026

Case brief

Case summary

 

                                      यह घटना तहसील धर्मशाला के गांव रसां तपोवन  की है। इस गांव में पल्लवी केस का घटनाक्रम एक अत्यंत दुखद और जटिल कानूनी मामला है, जो शिक्षण संस्थानों में रैगिंग, यौन उत्पीड़न और प्रशासनिक विफलता के गंभीर पहलुओं को उजागर करता है। इस पूरी त्रासदी की शुरुआत 18 सितंबर 2025 को धर्मशाला सरकारी डिग्री कॉलेज के परिसर में हुई, जहाँ बीए प्रथम वर्ष की छात्रा पल्लवी के साथ उसकी तीन सीनियर छात्राओं—हर्षिता, आकृति और कोमोलिका—द्वारा कथित तौर पर मारपीट और मानसिक प्रताड़ना (रैगिंग) की गई। इस घटना ने पल्लवी को गहरे मानसिक आघात में डाल दिया, लेकिन मामला तब और भी गंभीर हो गया जब पल्लवी ने अपनी मृत्यु से पूर्व साझा किए गए बयानों और वीडियो में कॉलेज के प्रोफेसर अशोक कुमार पर यौन उत्पीड़न और अनुचित स्पर्श (बैड टच) के आरोप लगाए। पल्लवी के अनुसार, जब उसने रैगिंग की शिकायत करने का प्रयास किया, तो उसे न्याय दिलाने के बजाय प्रोफेसर द्वारा प्रताड़ित किया गया, जिससे वह गहरे अवसाद (डिप्रेशन) और ट्रॉमा में चली गई। अगले तीन महीनों तक पल्लवी की स्थिति लगातार बिगड़ती रही; उसे पहले धर्मशाला के जोनल अस्पताल और फिर टांडा मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, जहाँ उसके अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। अंततः, 26 दिसंबर 2025 को लुधियाना के डीएमसी अस्पताल में उसने अंतिम सांस ली। पल्लवी की मृत्यु के बाद जन आक्रोश भड़क उठा और धर्मशाला सहित पूरे हिमाचल प्रदेश में "जस्टिस फॉर पल्लवी" की मांग को लेकर बड़े पैमाने पर कैंडल मार्च और विरोध प्रदर्शन हुए। पुलिस ने प्रोफेसर और तीनों छात्राओं के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं और हिमाचल प्रदेश रैगिंग निषेध अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की। इस मामले में हिमाचल प्रदेश अनुसूचित जाति आयोग ने भी हस्तक्षेप किया, क्योंकि पल्लवी एक दलित परिवार से थी और आरोपों में जातिगत भेदभाव के संकेत भी मिले थे। वर्तमान में यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है. पल्लवी के दोषियों के खिलाफ अभी तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई है. पुलिस का रवैया पूरी तरह से भेदभावपूर्ण और संवेदनहीन है। वे दोषियों को बचाने का प्रयास कर रहे हैं और पीड़ित परिवार पर ही दबाव बना रहे हैं।

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