
SMS Help line to Address Violence Against Dalits and Adivasis in India
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| Case posted by | NCDHR- NDMJ, Himachal Pradesh |
| Case code | HP-14-07-2026 |
| Case year | 20-May-2026 |
| Type of atrocity | Abuses by caste name in any place within public view |
| Whether the case is being followed in the court or not? | No |
| Fact finding date | Not recorded |
| Case incident date | 20-May-2026 |
| Place | Village: Not recorded Taluka:Not recorded District: UNA(DP) State: Himachal Pradesh |
| Police station | UNA SADAR |
| Complaint date | 14-Jul-2026 |
| FIR date | 01-Jan-1970 |
यह घटना हिमाचल प्रदेश के जिला ऊना के गांव संतोषगढ़ की है और यह गांव जिला मुख्यालय से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस गांव के वार्ड नंबर 3 के निवासी मदनलाल, जो कि अनुसूचित जाति (चमार जाति) से संबंध रखते हैं तथा पेशे से एक साधारण दुकानदार हैं, का 15 वर्षीय बेटा रामदयाल सनातन धर्म एसडी (सनातम धर्म) पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल, संतोषगढ़ में पहली कक्षा से लेकर दसवीं कक्षा तक का एक अत्यंत अनुशासित, ईमानदार व होनहार छात्र रहा है। आज दिन तक स्कूल प्रशासन द्वारा मदनलाल को रामदयाल के आचरण या पढ़ाई के विषय में कभी कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई थी। परंतु 20 मई 2026 को अचानक मदनलाल को फोन पर सूचना मिली कि उनके बेटे का नाम स्कूल से काट दिया गया है। जब वे तुरंत स्कूल पहुँचे, तो उन्होंने देखा कि उनके बेटे को एक अन्य प्रवासी लड़के के साथ क्लास से बाहर खड़ा किया गया था। स्कूल के अनुशासन का सम्मान करते हुए मदनलाल ने आवेश में आकर अपने ही बेटे को दो थप्पड़ लगा दिए। तत्पश्चात जब वे प्रधानाचार्य (प्रिंसिपल) के कक्ष में मिलने गए, तो प्रधानाचार्य ने उनके साथ अत्यंत अभद्र भाषा का प्रयोग किया तथा बिना किसी सबूत, लिखित शिकायत या ठोस आधार के 10वीं कक्षा के इस मासूम छात्र पर "गैंगस्टर" व "गुंडा" जैसे गंभीर व झूठे आरोप लगा दिए। लाचार पिता ने प्रधानाचार्य के पैर पकड़कर मिन्नतें कीं और बार-बार प्रार्थना की कि यदि उनके बेटे की कोई गलती है तो उसका लिखित प्रमाण या सीसीटीवी फुटेज दिखाया जाए, लेकिन प्रधानाचार्य ने कोई भी प्रमाण देने से साफ मना कर दिया और केवल मौखिक आरोप लगाते रहे। इसके बाद जब मदनलाल ने स्कूल के अन्य बच्चों व अभिभावकों से बातचीत की, तो किसी ने भी रामदयाल के खिलाफ कोई शिकायत होने की बात नहीं कही। इस घटनाक्रम के तुरंत बाद स्कूल में एक महीने की छुट्टियां हो गईं। छुट्टियां समाप्त होने के उपरांत भी पीड़ित पिता मदनलाल लगातार प्रधानाचार्य से मिलकर बच्चे के उज्ज्वल भविष्य और पढ़ाई के नुकसान की दुहाई देकर उसे वापस दाखिला देने की गुहार लगाते रहे, परंतु प्रधानाचार्य अपने अड़ियल एवं रसूखदार रवैये पर अड़े रहे और उसे 10वीं जैसी महत्वपूर्ण बोर्ड कक्षा में वापस लेने से साफ मना कर दिया। स्कूल प्रशासन की इस मनमानी, अनुचित व पक्षपातपूर्ण कार्रवाई से हताश होकर तथा छात्र के भविष्य को बर्बाद होने से बचाने हेतु पीड़ित पिता द्वारा इस पूरे घटनाक्रम और प्रधानाचार्य के रवैये को लेकर जिला उपायुक्त महोदय, ऊना को 14 जुलाई को एक लिखित शिकायत पत्र सौंपा गया।