महिला के साथ जाति सूचक गाली गलोच व अश्लील व्यावहार at Raipur (Code: HP/02-07-2026, Date: 02-Jul-2026 )

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Case Title

Case primary details

Case posted by NCDHR- NDMJ, Himachal Pradesh
Case code HP/02-07-2026
Case year 02-Jul-2026
Type of atrocity Abuses by caste name in any place within public view
Whether the case is being followed in the court or not? No

Fact Finding

Fact finding date

Fact finding date Not recorded

Case Incident

Case Incident details

Case incident date 18-Apr-2026
Place Village: Not recorded
Taluka:Not recorded
District: UNA(DP)
State: Himachal Pradesh
Police station BANGANA
Complaint date 04-Jul-2026
FIR date 04-Jul-2026

Case brief

Case summary

                                                             यह घटना जिला ऊना की तहसील बंगाणा के गांव रायेपुर मैदान की है। इस गांव में पीड़िता सुमन देवी पत्नी राजेशा कुमार, जिनकी आयु वर्तमान में 40 वर्ष है और जिन्होंने केवल पांचवीं कक्षा तक शिक्षा प्राप्त की है, अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए पूर्णतः घरेलू जीवन व्यतीत कर रही हैं। उनके कुल चार बच्चे हैं, जिनमें तीन बेटियां (क्रमशः 21 वर्ष, 18 वर्ष और 15 वर्ष) और एक 5 वर्ष का सबसे छोटा बेटा शामिल है। उनके पति राजेश कुमार आजीविका कमाने के लिए विदेश में रहते हैं, जिन्हें साल 2023 में गांव के ही सुनील कुमार उर्फ सोनू (पुत्र राम आसरा, निवासी बडौर) ने पैसे लेकर वीजा लगवाया और विदेश भिजवाया था। पति के विदेश जाने के कुछ ही समय बाद, आरोपी सुनील कुमार ने सुमन देवी की कम शिक्षा और अकेलेपन का फायदा उठाने की नीयत से उनके मोबाइल नंबर पर अश्लील मैसेज भेजने और वीडियो कॉल के माध्यम से अभद्र व गंदी-गंदी गालियां देना शुरू कर दिया।जब सुमन देवी ने इस अनैतिक व्यवहार का कड़ा विरोध किया और आरोपी को साफ शब्दों में कहा कि वे एक संस्कारी महिला हैं और उन्होंने उसके सारे पैसे भी वापस कर दिए हैं, तो आरोपी ने उन्हें धमकी दी कि उसने ही उनके पति को विदेश भेजा है और वह जब चाहे उन्हें वापस बुला सकता है।इसके बाद आरोपी ने शारीरिक संबंध बनाने का दबाव डाला और इनकार करने पर दुर्भावनापूर्वक सुमन देवी की तस्वीरों को एडिट करके इंटरनेट पर वायरल कर दिया तथा झूठे तथ्यों के साथ उन तस्वीरों को उनके पति राजेश कुमार को भेज दिया ताकि उनकी छवि धूमिल की जा सके. इंटरनेट पर फोटो देखने के बाद, उनके पति ने उन पर गंभीर संदेह करना शुरू कर दिया। सुमन देवी ने अपने पति को आरोपी की इस घिनौनी साजिश और नाजायज दबाव के बारे में सब कुछ सच-सच बताया, लेकिन आरोपी द्वारा फैलाए गए भ्रम के कारण उनके पति हर समय उन पर शक करने लगे और उन्हें मानसिक व शारीरिक रूप से बुरी तरह प्रताड़ित करने लगे, जिससे सुमन देवी का घरेलू जीवन पूरी तरह नरक बन गया।

इस मानसिक और पारिवारिक उत्पीड़न के बीच, आरोपी सुनील कुमार उर्फ सोनू की हिम्मत इतनी बढ़ गई कि उसने सुमन देवी के साथ-साथ उनके बुजुर्ग ससुर को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया ताकि परिवार को पूरी तरह तोड़ा जा सके। दिनांक 18 अप्रैल 2026 को दोपहर करीब 3:00 बजे, जब सुमन देवी के ससुर हमेशा की तरह पशुशाला की तरफ जा रहे थे, तो आरोपी सुनील कुमार ने रास्ते में उनकी गाड़ी रोक ली और उनके साथ अत्यंत अभद्र व्यवहार करते हुए उन्हें जान से मारने की सीधी धमकी दी।आरोपी ने ससुर को सरेआम अपमानित करते हुए उनके लिए "चमार" जैसे घोर जातिसूचक शब्दों का बार-बार इस्तेमाल किया और समाज में उनकी औकात दिखाने की बात कही।इस घटना के दौरान जब उनके ससुर ने आरोपी को ऐसी नीच हरकतें करने और जातिसूचक गालियां देने से रोका, तो वहां मौजूद राजीव उर्फ कालू की उपस्थिति में भी आरोपी ने कोई शालीनता नहीं दिखाई और पूरे परिवार को बर्बाद करने की धमकी देता रहा।एक तरफ पति द्वारा लगातार किया जा रहा मानसिक उत्पीड़न व शक का माहौल, और दूसरी तरफ आरोपी द्वारा उनके ससुर को दी जा रही जातिसूचक प्रताड़ना—इन सभी असहनीय परिस्थितियों से तंग आकर जब कोई रास्ता नहीं बचा, तब इस गंभीर घटना की सूचना मिलने पर 'नेशनल कैंपेन ऑन दलित ह्यूमन राइट्स' (NCDHR) की टीम ने मौका पर जाकर स्थिति का जायजा लिया। NCDHR की टीम ने मौका-ए-वारदात पर पहुंचकर पीड़िता सुमन देवी का विस्तृत बयान लिया और मामले की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्र के पुलिस उपाधीक्षक (DSP) व थाना प्रभारी (SHO) से मुलाकात की। NCDHR टीम के इस कड़े हस्तक्षेप और कानूनी समझ के बाद, अंततः पुलिस प्रशासन हरकत में आया और थाना बंगाना (जिला ऊना, हिमाचल प्रदेश) में आरोपी सुनील कुमार के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 126(2) (गलत तरीके से रोकना), 352 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करना), 351(2) (आपराधिक धमकी) तथा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 (संशोधन 2015) की धारा 3(1)(r) और 3(1)(s) (सार्वजनिक स्थान पर जातिसूचक अपमान व प्रताड़ना) के तहत यह आधिकारिक प्राथमिकी (FIR) दर्ज करवाई गई.

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