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ब्राहमण के मकान के साथ लग कर चलने पर दलित कि पिटाई at Gondpur

  • Posted by: NCDHR- NDMJ, Himachal Pradesh
  • Date of incident: 11-10-2024
  • Create date: 10-04-2026
  • State:: Himachal Pradesh
  • District:: UNA(DP)
  • Police station:: Tahliwal
  • Chargesheet:: No
  • Summary::

                                जिला ऊना की तहसील हरोली के अंतर्गत ग्राम गोंदपुर जयचन्द निवासी 54 वर्षीय गुरनाम सिंह सुपुत्र श्री रामधन, जो दलित समाज से संबंध रखते हैं और आठवीं तक शिक्षित होकर गोंदपुर बुल्ला में टेलरिंग का कार्य कर अपने चार बच्चों के परिवार का भरण-पोषण करते हैं, के साथ हुई जातिगत विद्वेष व मारपीट की घटना अत्यंत गंभीर है। घटनाक्रम के अनुसार, 11 अक्टूबर 2024 की रात लगभग 7:15 बजे जब गुरनाम सिंह अपनी दुकान पर थे, तब गांव के ही दो युवक उन्हें शादी का निमंत्रण देने आए, जिसके पश्चात करीब 7:30 बजे वे पैदल अपने घर की ओर निकले; रास्ते में मंत्री की कोठी से आगे बढ़ते समय अनजाने में उनका पैर गांव के ही ब्राह्मण समुदाय से संबंधित संदीप उर्फ लाडी पुत्र प्रेमचंद के घर के 'रैंप' पर टिक गया, जिसे संदीप की पत्नी ने लगभग 15 फीट की दूरी से देख लिया था। इसी रंजिश के चलते अगले दिन 12 अक्टूबर 2024 को जब गुरनाम सिंह सुबह अपने खेत में दराती (दातर) को तेज करवाने जा रहे थे, तभी संदीप उर्फ लाडी ने उन्हें रास्ते में ही घेर लिया और रैंप पर पैर रखने जैसी तुच्छ बात को लेकर जातिगत अपमान करते हुए बेसबॉल के डंडे से उन पर जानलेवा हमला कर दिया, जिससे उनके दाएं हाथ की हड्डी बुरी तरह टूट गई। इस विवाद को सुलझाने हेतु 13 अक्टूबर 2024 को सुबह 8:00 बजे एक पंचायत बुलाई गई जिसमें उप-प्रधान और वार्ड पंच भी उपस्थित थे, परंतु गुरनाम सिंह का आरोप है कि पंचायत में मौजूद अधिकतर लोग प्रभावशाली पक्ष (संदीप) के समर्थक थे, जिसके चलते वहां न्याय के बजाय पीड़ित को ही धमकाया गया और संदीप ने सरेआम पंचायत में गुरनाम सिंह को जान से मारने की धमकी देते हुए कहा कि जो भी उसके रैंप पर पैर रखेगा वह उसका यही हश्र करेगा। इतना ही नहीं, पीड़ित के अनुसार संदीप ने उनकी पत्नी के साथ भी बदसलूकी की और उनका गला तक दबाया, जिससे स्पष्ट है कि आरोपी पूरे परिवार को आतंकित करने पर उतारू था। अंततः सुरक्षा और न्याय की गुहार लगाते हुए गुरनाम सिंह ने इस घटना की लिखित शिकायत पुलिस थाना टाहलीवाल में दर्ज करवाई, हालांकि बाद में गांव के कुछ व्यक्तियों के हस्तक्षेप के बाद इस मामले में आपसी राजीनामा करवा दिया गया, लेकिन यह घटना सामाजिक भेदभाव और शारीरिक उत्पीड़न की एक दर्दनाक तस्वीर पेश करती है।

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नर्सिंग की दलित छात्रा की भाग कर शादी करना, होटलों में जाकर अपनी इज्ज़त लुटवाने जैसी झूठी अफवाह फैलाना at Bathu (Gurplah)

  • Posted by: NCDHR- NDMJ, Himachal Pradesh
  • Date of incident: 01-10-2024
  • Create date: 10-04-2026
  • State:: Himachal Pradesh
  • District:: UNA(DP)
  • Police station:: Tahliwal
  • Chargesheet:: No
  • Summary::

    यह घटना जिला ऊना की तहसील हरोली के गांव बाथू की है इस गांव में दलित समाज से नेहा कुमारी पुत्री हरी ओम रहती है जिसकी उम्र 21 वर्ष की है. नेहा कुमारी पंजाब के बंगा के पास गुरु नानक कोलेज ऑफ़ नर्सिंग में BSc नर्सिंग कर रही है. वह अनुसूचित जाति में से चमार जाति से सम्बन्ध रखती है. उसके पिता जी मेडिकल स्टोर पर काम करते है. वह तीन भाई बहन है दो बहने एक भाई है. इसकी छोटी बहन भटोली कोलेज में BA कर रही है और छोटा भाई 10th कक्षा बाल भारती बाथू स्कूल में पढ़ रहा है. इसकी मम्मी घर पर ही रह कर घर का काम काज करती है. इसके गांव का पता :- गांव व डाकघर बाथू, तह० हरोली, जिला ऊना हि०प्र० है.

                   दिनाक 1 अक्तूबर 2024 को नेहा कुमारी के घर पर मंजीत पत्नी नरेश कुमार उर्फ़ हैप्पी निवासी बाथू जो कि इनके ही कूल परिवार से है आई और उसने नेहा की मम्मी से आकर कहा कि चाची आपसे एक बात करनी है आप बुरा मत मानना तो उसने बताया की उसके पति नरेश उर्फ़ हैप्पी ने उसको बताया कि पुरे गांव और रिश्ते दारी में बात फैली हुई है की आपकी बड़ी बेटी नेहा ने राहुल राणा उर्फ़ गग्गी स्पुत्र वकील सिंह जाति राजपूत निवासी बाथू तहसील हरोली जिला ऊना हि०प्र० के साथ कोर्ट में शादी कर ली है और घर से भागने वाली है और उसके पति के मोबाइलों कि दूकान पर कोई अज्ञात ग्राहक बात कर रहे थे कि राहुल राणा और उसका भाई व उसके दोस्त कहते है कि “चमारा दी नेहा ठोक बजा ली है और कोर्ट में शादी कर ली है और बस अब भगानी बाकी है “ इतनी बात सुनते ही नेहा की  मम्मी के पांव तल्ले ज़मीन निकल गई और पुरे घर में मायूसी का माहोल बन गया. नेहा की  मम्मी ने तुरंत उसको कालेज में फोन किया और उसके साथ इस बारे बात करी यह बात सुन कर नेहा ने रोते हुए बताया कि मम्मी ऐसी कोई बात नहीं है मैं आपकी इज्ज़त के खिलाफ कोई भी कभी भी ऐसा काम नहीं कर सकती जिससे आपका सर झुक जाए. उसी दिन शाम को उसके चाचा जी नाम शीतल दास अपनी गाडी में नेहा को कोलेज से घर लेकर आ गए क्योंकि दुसरे दिन कालेज से सरकारी छुट्टी थी नेहा के चाचा जी ही उसको कोलज छोड़ने और लेजाने आते है और उसकी सारी पढ़ाई का सारा खर्च भी वही उठा रहे है.

              नेहा ने अपनी +2 तक की सारी पढ़ाई अपने ही गांव के बाल भारती स्कुल में की है. इसी दोरान उसकी क्लास में राहुल राणा उर्फ़ गग्गी स्पुत्र वकील सिंह जाति राजपूत निवासी बाथू उसके साथ ही पढता था और अकसर उसको पढ़ाई के चलते या स्कुल के काम को पूछने के लिए फोन किया करता था इसी के चलते उसने नेहा को बार बार यह बोलना शुरू कर दिया कि मैं तुमसे प्यार करता हूँ तुम्हारे लिए अपना सब कुछ कुर्बान कर दूंगा लेकिन नेहा ने राहुल राणा उर्फ़ गग्गी को कहा ये सब गल्त है मेरे मन में ऐसा कुछ भी नहीं है और ना ही मैं ऐसे किसी चक्कर में पडना चाहती हूँ. लेकिन नेहा के समझाने के बावजूद भी वह गल्त तरीके से नेहा को फोन करने को नहीं हटा तो मजबूरन उसे अपनी सिम बदलनी पड़ी.

                         नेहा पंजाब के बंगा के पास गुरु नानक कोलेज ऑफ़ नर्सिंग में BSc नर्सिंग कर रही है और उसकी चार साल की पढ़ाई पूरी होने को सिर्फ तीन महीने बाकी है पर राहुल राणा उर्फ़ गग्गी व उसके भाई साहिल राणा उसके भाई के दोस्त रमन सैनी स्पुत्र कश्मीर सिंह ने पुरे गांव में यह अफवाह फैला दी है कि नेहा और राहुल राणा उर्फ़ गग्गी ने कोर्ट में शादी कर ली है व घर से भागने वाले है इतना ही नहीं राहुल राणा उर्फ़ गग्गी ने यह तक अफवाह फैलाई है कि नेहा को कई बार होटल में ले जाकर शारीरिक सम्बन्ध बनाए है. यह सारी बातें नेहा के पूरे गांव व पूरी रिश्त्तेदारी में फ़ैल गई है और हर रोज उसके परिवार वालों को किसी ना किसी का फोन आ रहा है और इन सब बातों को लेकर चर्चा हो रही है जिस कारण नेहा व उसका पूरा परिवार मानसिक तनाव से गुजर रहे है और बहुत ज्यादा परेशान हो गए है इस बात को लेकर नेहा के पिता जी बहुत बुरे सदमे में है और उनको डाक्टर से दवाई लेनी पड़ रही है. नेहा की छोटी बहन अपनी BA कि पढ़ाई भटोली कोलेज अजोली मौड़ में कर रही है दिनाक 4/10/24 को नेहा की छोटी बहन बाणी कोलेज से वापिस आई और बस से उतर रही थी तो राहुल राणा के भाई का दोस्त रमन सैनी अपनी गाडी में आया और बिलकुल उसकी  बहन के साथ से सटा कर गाडी लेकर गया और गन्दी नजर से देखते हुए अपनी मुछों को ताव देता हुआ चला गया इतना ही नहीं यही रमन सैनी और राहुल राणा का भाई साहिल राणा खुल्ली जीप में घुमते है और नेहा के दोनों भाई विपिन व चाचा का लड़का मन्तोश जब टीयुषन से वापिस बाथडी गांव से आते है तो दोनों अपनी जीप में बदमाशी वाले गाने लगा कर उनके पास गाडी रोक कर आगे लेकर जाते है.इस घटना को लेकर DSP अजय ठाकुर के पास प्रार्थना पत्र दिया गया जिसकी PC बना कर थाना टाहलीवाल भेजा गया वहा पर कार्यवाही के दोरान दोषी परिवार सारा आकर नेहा के पांव पड़ गया और कहा कि यह अफवाह हमने ना फैलाई है जिसके चलते इस केस का नेहा कुमारी के परिवार द्वारा वकील मखन भाटीया को साथ लेकर FA डेविट बना कर नोटीरी से मोहर लगा कर राजीनामा किया गया 

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दलित परिवार के घर का बिजली का मीटर 900 मीटर दूर खम्बे पर लगाना. at Jol

  • Posted by: NCDHR- NDMJ, Himachal Pradesh
  • Date of incident: 23-08-2024
  • Create date: 10-04-2026
  • State:: Himachal Pradesh
  • District:: UNA(DP)
  • Police station:: Jol
  • Chargesheet:: No
  • Summary::

                                                                 यह घटना तहसील बंगाणा के गांव रिबाड़ की है। इस गांव में प्रार्थिया रेखा देवी पत्नी श्री पवन कुमार, निवासी गांव जोल, तहसील बंगाणा, जिला ऊना (हि०प्र०), जो कि अनुसूचित जाति (जुलाहा) से संबंधित एक निर्धन महिला है, का कहना है कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से अपने मायके द्वारा खरीद कर दी गई जमीन पर रह रही है और लगभग 15 वर्ष पूर्व उसने अपने पति के साथ मिलकर वहां एक कच्चा टीन-पोश मकान बनाया था, परंतु तब से लेकर आज तक वह बुनियादी सुविधाओं के अभाव में अत्यंत दयनीय जीवन व्यतीत कर रही है। प्रार्थिया ने जब बिजली के मीटर के लिए आवेदन किया, तो विभाग ने पास में बिजली का खंबा न होने का हवाला देकर मीटर लगाने से मना कर दिया और अंततः घर से 900 मीटर दूर खंबा लगाकर मीटर लगाया, जिसके लिए प्रार्थिया को कर्ज लेकर 7,000 रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च कर तार खरीदनी पड़ी, जो अब समय के साथ जर्जर और खराब हो चुकी है, जिसके परिणामस्वरूप बिजली का बिल सामान्य 400-600 रुपये से बढ़कर अब 2000-3000 रुपये तक आने लगा है जो कि प्रार्थिया की आर्थिक स्थिति से बाहर है। हालांकि विभाग ने बाद में घर के समीप दो खंबे तो लगाए, परंतु गांव के ही एक निवासी जोगिन्दर द्वारा अवैध रूप से तार लगाने में बाधा उत्पन्न करने के कारण वे खंबे आज भी अनुपयोगी खड़े हैं और प्रार्थिया का परिवार अंधेरे में रहने को मजबूर है। केवल बिजली ही नहीं, बल्कि पेयजल की स्थिति भी गंभीर है क्योंकि घर में पानी का नल न होने के कारण प्रार्थिया को एक किलोमीटर दूर हैंडपंप से पानी ढोकर लाना पड़ता है, जिससे उसका दैनिक जीवन और भी कष्टकारी हो गया है। इसके अतिरिक्त, प्रार्थिया का मकान आज भी कच्चा और असुरक्षित है जिसके लिए उसने ग्राम पंचायत प्रधान से बार-बार पक्के मकान हेतु अनुदान राशि की गुहार लगाई, परंतु हर बार उसे केवल आश्वासन ही मिला और धरातल पर कोई सहायता प्राप्त नहीं हुई। प्रार्थिया के पति एक दिहाड़ी मजदूर हैं जिनकी आय अनिश्चित है, ऐसे में तीन छोटे बच्चों के पालन-पोषण और इस महंगाई के दौर में बुनियादी सुविधाओं के बिना रहना परिवार के लिए असंभव होता जा रहा है, अतः शासन-प्रशासन से विनम्र प्रार्थना है कि बिजली की तार लगवाकर मीटर घर पर स्थानांतरित किया जाए, घर में पानी का नल लगवाया जाए और पक्के मकान हेतु उचित सरकारी सहायता प्रदान की जाए ताकि इस गरीब परिवार को न्याय मिल सके।

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दलित समाज के लोगो को मंदिर में गुणगान करने से रोकना at Makraid

  • Posted by: NCDHR- NDMJ, Himachal Pradesh
  • Date of incident: 01-08-2024
  • Create date: 10-04-2026
  • State:: Himachal Pradesh
  • District:: UNA(DP)
  • Police station:: Una Sadar
  • Chargesheet:: No
  • Summary::

                                                                 यह घटना हिमाचल प्रदेश के जिला ऊना के अंतर्गत उप-तहसील बिहडू कलां के गांव मकरैड में स्थित प्राचीन बाबा सिद्ध राजा भरथरी नाथ जी का मंदिर, जो पूर्णतः सरकारी एवं सार्वजनिक भूमि पर निर्मित है, वर्तमान में गहरे सामाजिक अन्याय और संवैधानिक अधिकारों के हनन का गवाह बना हुआ है। इस मंदिर की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि यह रही है कि प्रतिवर्ष रक्षाबंधन के पावन अवसर पर यहाँ से नौ दिनों के लिए चार छत्र मंडलियाँ निकलती हैं, जो गांव-गांव जाकर गोगा जाहर वीर जी का गुणगान करती हैं और भक्तों से दान-दक्षिणा (अनाज, वस्त्र, धन) एकत्रित करती हैं। विडंबना यह है कि इन मंडलियों में मुख्य कलाकार, गायक और वाद्य यंत्र (डमरू आदि) बजाने वाले सभी व्यक्ति चमार जाति (दलित समाज) के ही होते हैं, जिनके कौशल और भक्ति के बिना यह परंपरा अधूरी है, परंतु इन मंडलियों का संपूर्ण वित्तीय और प्रशासनिक नियंत्रण जट समुदाय के 'मोहरीदारों' के हाथों में केंद्रित है, जो इस सार्वजनिक दान को मंदिर के विकास के बजाय निजी आय के रूप में उपयोग करते आए हैं। वर्षों से चली आ रही अमानवीय कुप्रथा के अनुसार, इन मंडलियों को दलित बस्तियों में प्रवेश करने और वहां से दान लेने से वर्जित रखा गया था, जिसे "बुजुर्गों की रूढ़िवादी परंपरा" बताकर न्यायसंगत ठहराया जाता रहा। जब स्थानीय दलित समाज ने इस भेदभाव के विरुद्ध आवाज उठाई और स्वयं की छत्र मंडली निकालने की इच्छा प्रकट की, तो मंदिर कमेटी के वर्तमान स्वयंभू प्रधान बक्शीश सिंह ने जातिगत श्रेष्ठता का प्रदर्शन करते हुए उन्हें मंदिर के मूल अधिकारों से वंचित करने का प्रयास किया और केवल 'वाईती' (सहायक गायक) के रूप में अधीन रहने का फरमान सुनाया। इस गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन के विरोध में जब जिला उपायुक्त महोदय को प्रार्थना पत्र दिया गया, तब प्रशासन ने सक्रियता दिखाते हुए एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया, जिसमें SDM बंगाणा, DSP, तहसीलदार, SHO, पटवारी और पंचायत प्रतिनिधियों को शामिल किया गया। इस पूरे प्रकरण में राज्य महासचिव (NCDHR) के रूप में मेरी उपस्थिति में 16 अगस्त 2024 को मंदिर परिसर में एक आधिकारिक बैठक आयोजित की गई, जहाँ प्रशासन और दोनों पक्षों के मध्य एक ऐतिहासिक 'राजीनामा' हुआ। इस समझौते के तहत प्रशासन ने स्वीकार किया कि मंदिर सार्वजनिक संपत्ति है और दलित समाज को अपना स्वतंत्र छत्र उठाने, अपनी मंडली बनाने और मंदिर के प्रबंधन में समान भागीदारी का पूर्ण अधिकार है। उस समय शांति व्यवस्था बनाए रखने और समय की कमी का हवाला देते हुए प्रशासनिक कमेटी ने यह लिखित आश्वासन दिया था कि मंदिर की एक समावेशी कमेटी का पंजीकरण शीघ्र किया जाएगा और वर्ष 2025 से दलित समाज का पृथक छत्र निकाला जाएगा। परंतु, अत्यंत खेद और आक्रोश का विषय यह है कि इस आधिकारिक समझौते के छह माह बीत जाने के उपरांत भी धरातल पर कोई भी ठोस प्रगति नहीं हुई है; न तो मंदिर कमेटी का गठन हुआ है और न ही पंजीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया है। प्रशासन की इस उदासीनता और टालमटोल की नीति ने उस 'राजीनामे' की पवित्रता को समाप्त कर दिया है जो उच्चाधिकारियों की उपस्थिति में सर्वसम्मति से तय हुआ था। वर्तमान स्थिति यह है कि मामला अभी भी अधर में लटका हुआ है और दलित समाज खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। यह घटनाक्रम न केवल एक समुदाय के धार्मिक और संवैधानिक अधिकारों का दमन है, बल्कि प्रशासनिक विफलता का भी जीवंत प्रमाण है, जहाँ एक ओर छुआछूत जैसी कुरीतियों को संरक्षण मिल रहा है और दूसरी ओर न्याय के लिए किए गए समझौतों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। अतः, अब यह अनिवार्य हो गया है कि इस दोहरे मापदंड के विरुद्ध कड़ा संज्ञान लिया जाए और आगामी अगस्त 2025 के आयोजन से पूर्व मंदिर कमेटी का लोकतांत्रिक गठन सुनिश्चित कर दलित समाज को उनके मानवाधिकारों के अनुरूप स्वतंत्र छत्र उठाने की अनुमति प्रदान की जाए, अन्यथा यह मामला सामाजिक समरसता के लिए एक गंभीर चुनौती बन सकता है।

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दलित महिला से साजिश कर छिनी आँगन वाडी कि नौकरी at Badeda Lowr

  • Posted by: NCDHR- NDMJ, Himachal Pradesh
  • Date of incident: 03-04-2024
  • Create date: 10-04-2026
  • State:: Himachal Pradesh
  • District:: UNA(DP)
  • Police station:: Haroli
  • Chargesheet:: No
  • Summary::

                                यह घटना जिला ऊना की तहसील तहसील हरोली के गांव लोअर बढेडा कि है जिसमे गांव लोअर बढेडा में वार्ड न० 1 कि आँगन वाडी में सहायिका (हेल्पर) की पोस्ट निकली जिसके लिए 3 अगस्त 2024 को कमलेश कुमारी ने अपना आवेदन भर दिया और सारी ओपचारिक्ताएं पूरी कर दी जिसके चलते उसके  पास दिनाक 24/08/24 को आँगन वाडी दफ्तर से मैडम ज्योति पाठक का फोन आया और कहा कि आपकी 28 अगस्त को इंटरव्यू है. 28/08/24 को कमलेश कुमारी अपनी इंटरव्यू दी और उसमे पास हो गई उसके साथ उसके ही गांव से नेहा ठाकुर पत्नी रविंदर कुमार जाति राजपूत ने अपनी इंटरव्यू दी जिसके अंक कम आये वहां पर प्रमाणित हो गया कि आँगन वाडी में सहायिका (हेल्पर) कि नोकरी कमलेश को  मिल रही है लेकिन 30/08/24 को कमलेश के पति को  तहसीलदार दफ्तर से फोन आया कि आपके खिलाफ शिकायत कमलेश का पति अपने दोस्त सोनी कुमार के साथ तहसीलदार दफ्तर में गया वहां पर पता चला कि रघुवीर सिंह स्पुत्र ठाकुर सिंह जाति राजपूत ने उनके आय प्रमाण पत्र के खिलाफ शिकायत करी है और लिखा है कि इनके पास अधिक भूमि है गाडी है और कलेश के पति कि आय ज्यादा है जबकि गाडी उन्होंने उधार ली थी और कब की बेच दी है जिसके बेचने के कागज़ात उनके पास है कमलेश के पास भूमि करीब 8-9 कनाल है इसमें से थोड़ी बहुत भूमि ही खेती वाडी काबिल है जिसमे कि कभी कभार ही अच्छी फसल होती है. जब कमलेश का पति अपने दोस्त सोनी कुमार के साथ तहसीलदार दफ्तर में था तो मौका पर रघुवीर सिंह भी वहीँ पर था जो कि बुरी तरह से कमलेश के पति व सोनी कुमार के साथ बहस करने लगा कि यह नोकरी तो नेहा ठाकुर को ही मिलेगी तुम लोगो को हक़ हलाल की खानी नहीं आती. जिसके बाद तहसीलदार साब ने कमलेश के पति का  आय प्रमाण पत्र रद्द कर दिया दुःख कि बात है कि ना ही कमलेश के पास गाड़ी है, ना ही पक्का मकान, ना ही उसका  पति नौकरी करता है, ना उनकी खेती वाडी अच्छे से होती है और उनके ऊपर सोसाईटी का करीब 3 लाख क़र्ज़ भी है फिर भी उनका आय प्रमाण पत्र रद्द कर दिया गया, जबकि नेहा ठाकुर के पास बहुत सारी ज़मीन है उसका पति डीजल मकैनिक है और अच्छी खासी नौकरी कर रहा है फिर भी यह आँगन वाडी में सहायिका (हेल्पर) कि नौकरी नेहा ठाकुर को मिल गई है.

    उपायुक्त महोदय से गुजारिश कि गई कि आँगन वाडी में सहायिका (हेल्पर) कि पोस्ट पर कमलेश कुमारी को बहाल किया जाए व नेहा ठाकुर की आँगन वाडी में सहायिका (हेल्पर) नोकरी को रद्द किया जाए उसकी आय की जांच करवाई जाए व कमलेश के पति आय कि पुन: जांच करते हुए आय प्रमाण पत्र को भी बहाल किया जाए

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