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The incident took place in Madhuban village, under the jurisdiction of the Madhuban police station in the East Champaran district of Bihar. On July 21, 2026, influential locals launched a life-threatening, armed attack on the victim, Pinki Devi (wife of the late Vinod Ram), and her 17-year-old son, Kanhaiya Kumar. The assailants hurled caste-based slurs at the victims and inflicted severe, bloodied injuries during the assault, specifically fracturing the heads of both the mother and son. A case (Case No. 257/26) has been registered at the Madhuban police station. The incident stemmed from the fact that the assailant, Lalan Prasad, had illegally obtained the registration of land belonging to Pinki Devi and was attempting to forcibly occupy it—an action the victims had opposed. It is noteworthy that the victim belongs to a Scheduled Caste and is extremely poor; her husband is deceased. In contrast, the assailant is an influential and affluent individual belonging to a Backward Caste.
यह अत्यंत गंभीर, संवेदनशील एवं जातिगत उत्पीड़न से संबंधित घटना हिमाचल प्रदेश के जिला ऊना की ग्राम पंचायत भटोली की है, जहाँ की स्थाई निवासी श्रीमती चरणजीत कौर उर्फ रानी पत्नी श्री राम कुमार (आयु लगभग 42 वर्ष, अनुसूचित जाति-चमार समुदाय से संबंधित, शैक्षणिक योग्यता मात्र आठवीं पास) वर्तमान में पंजाब के नंगल स्थित सरकारी स्कूल, विभोर साहिब में सफाई सेवक के रूप में कार्यरत रहकर मात्र ₹3000/- प्रतिमाह के मामूली वेतन पर अपने और अपने 11वीं कक्षा में अध्ययनरत पुत्र का जीवन-यापन कर रही हैं, तथा चरणजीत का विवाह दिनांक 19 सितंबर 2023 को पारिवारिक सहमति व कानूनी प्रक्रिया के तहत नंगल कोर्ट में श्री राम कुमार (जो कि उच्च ब्राह्मण जाति से संबंध रखते हैं) के साथ संपन्न हुआ था, जिसमें दोनों पक्ष पूर्व से तलाकशुदा थे और चरणजीत के पति श्री राम कुमार एवं उनके स्वर्गीय पिता (चरणजीत के ससुर) ने चरणजीत तथा उसके पहली शादी से उत्पन्न बेटे को पूरे मान-सम्मान एवं सहर्ष भाव से अपनाया था, परंतु चरणजीत के इस अंतर्जातीय विवाह से उनके पड़ोस में रहने वाले व्यक्ति विश्व मोहन सुपुत्र श्री मंगत राम, आशु सुपुत्र श्री विश्व मोहन, शैली पत्नी श्री विश्व मोहन तथा चरणजीत की सगी जेठानी पूजा पत्नी श्री संजीव कुमार (जिसका पति विदेश में रहता है) अत्यंत रंजिशग्रस्त, द्वेषपूर्ण व नाखुश रहने लगे, और इस गहरी दुश्मनी एवं रंजिश की मुख्य वजह यह थी कि यदि चरणजीत के पति श्री राम कुमार अविवाहित रहते तो चरणजीत के ससुर जी की समस्त चल-अचल संपत्ति पर जेठानी पूजा और उसके परिवार का एकाधिकार हो जाता तथा वे उसे आसानी से हड़प लेते, किंतु चरणजीत और उसके पुत्र के वैधानिक रूप से परिवार में आ जाने के कारण उनकी संपत्ति हड़पने की नीयत नाकाम हो गई, जिसके परिणामस्वरूप आरोपी पूजा, विश्व मोहन, आशु और शैली ने एक राय होकर चरणजीत को उसके घर से बेदखल करने और मानसिक-शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने की नीयत से आए दिन जातिसूचक, अपमानजनक व ज़लील करने वाली भाषा का प्रयोग करना शुरू कर दिया, जहाँ वे चरणजीत को सार्वजनिक रूप से यह कहकर नीचा दिखाते कि "कहां से यह चमारी आ गई है" और "कहां से यह कुत्ता इस चमारी को ब्याह के ले आया है", इतना ही नहीं पड़ोसी विश्व मोहन ने एक आपराधिक षड्यंत्र के तहत अपने मकान की दीवार पर एक शक्तिशाली सीसीटीवी कैमरा (CCTV Camera) इस प्रकार जानबूझकर कोण (Angle) बनाकर स्थापित कर दिया जिसका सीधा फोकस चरणजीत और उनके पति के निजी शयनकक्ष (Bedroom) की ओर रहता है, जिसकी अत्यधिक तेज फ्लैशलाइट पूरी रात चरणजीत के कमरे के भीतर आती है जिससे चरणजीत एवं उनके पति की वैवाहिक गोपनीयता, निजता (Privacy) और मौलिक अधिकारों का सीधा हनन होता है, तथा जब चरणजीत और उनके पति ने इस संबंध में विश्व मोहन से अत्यंत सौहार्दपूर्ण ढंग से बातचीत कर कैमरे का रुख बदलने का आग्रह किया तो पूरा परिवार हिंसक व झगड़े पर आमादा हो गया, और इसी क्रम में दिनांक 16 जुलाई को जब चरणजीत ने पुनः सीसीटीवी कैमरा हटाने का विनम्र अनुरोध किया तो शैली पत्नी विश्व मोहन ने सरेआम गंदी, अश्लील और अभद्र गालियां देते हुए चिल्लाकर कहा कि "साली ने पांच-पांच खसम कर रखे हैं चमारी कहीं की" और विश्व मोहन ने खुलेआम जातिगत विद्वेष फैलाते हुए कहा कि "बहनचोद राम ने तो चमारी हमारे पड़ोस में ला रखी है", साथ ही आशु सुपुत्र विश्व मोहन ने चरणजीत और उनके परिवार को जान से मारने की प्रत्यक्ष धमकी दी, जिसकी बाबत चरणजीत व उनके पति ने स्थानीय ग्राम पंचायत भटोली के प्रधान श्री सतीश कुमार जी को एक लिखित शिकायत पत्र भी प्रस्तुत किया था, परंतु स्थानीय स्तर पर कोई ठोस कानूनी, प्रशासनिक या दंडात्मक कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई जिससे आरोपियों के हौसले और बुलंद हो गए, इसके अतिरिक्त चरणजीत की जेठानी पूजा ने अपने परिसर में अत्यंत हिंसक, आक्रामक एवं जानलेवा नस्ल के पिटबुल (Pitbull) एवं बुलटेरियर (Bull Terrier) जैसे खतरनाक कुत्ते पाल रखे हैं, और चूंकि चरणजीत के घर का शौचालय (Bathroom/Toilet) मूल रिहायशी घर से लगभग 10 से 20 मीटर की दूरी पर स्थित है जहाँ नित्य कर्म हेतु जाना अनिवार्य होता है, तो आरोपी पूजा जानबूझकर चरणजीत और उसके नाबालिग बेटे को गंभीर शारीरिक चोट पहुँचाने, कटवाने और खौफ के साए में रखकर घर छोड़ने पर मजबूर करने की दुर्भावना से उन खूंखार हिंसक कुत्तों को शौचालय जाने वाले रास्ते पर चरणजीत की तरफ खुला छोड़ देती है, जो सीधे काटने और झपटने के लिए दौड़ते हैं, जिसके कारण चरणजीत और उसके 11वीं कक्षा में पढ़ने वाले नाबालिग बच्चे का शौचालय तक जाना दुश्वार हो गया है तथा पूरा परिवार अपने ही घर में अत्यंत भय, खौफ और असुरक्षा के माहौल में जीने को मजबूर है, यहाँ यह तथ्य भी अत्यंत उल्लेखनीय एवं प्रासंगिक है कि दिनांक 5 अप्रैल 2026 को चरणजीत के पूज्य ससुर जी का स्वर्गवास हो गया था और अपनी मृत्यु से कुछ समय पूर्व उन्होंने चरणजीत को स्पष्ट रूप से सचेत व सतर्क करते हुए कहा था कि "मेरी बेटी, मुझे तुम्हारी जाति से कोई आपत्ति नहीं है, परंतु मेरे जाने के बाद मेरी बड़ी बहू पूजा और आस-पड़ोस के लोग तुम्हें जातिगत कारणों और संपत्ति के लालच में बहुत तंग करेंगे, इसलिए संभल कर रहना", और ससुर जी के देहांत के तुरंत बाद इन सभी नामजद आरोपियों (1. विश्व मोहन, 2. आशु, 3. शैली, 4. पूजा) का अत्याचार, उत्पीड़न और आपराधिक कृतृत्य चरम सीमा पर पहुँच गया है जहाँ वे एक सुनियोजित षड्यंत्र के तहत चरणजीत को अनवरत जातिसूचक गालियां देकर, हिंसक व खूंखार कुत्तों से जानलेवा हमला करवाने का प्रयास करके, सीसीटीवी कैमरे के माध्यम से निजता का हनन करके तथा सामाजिक-मानसिक प्रताड़ना देकर बेघर करने व संपत्ति हड़पने की नीयत से घर छोड़ने पर विवश कर रहे हैं, इस सारी घटना बारे NCDHR टीम की मदद से DSP अजय ठाकुर से मिला गया व इस घटना शिकायत कर दोषियों खिलाफ मामला दर्ज करवाया गया.
यह घटना जिला ऊना की तहसील हरोली की पंचायत छेत्रां के गाँव वीदड्वाल की है. इस गांवके बार्ड नंबर 4 में प्रमोद कुमार स्पुत्र स्व: कुंदन लाल जाति भन्झडा (SC) रहता है जिसकी उम्र 53 वर्ष की है और वह छेत्रां पंचायत में चौकीदार के रूप में नियुक्त है. ग्राम पंचायत बीदडवाल (क्षेत्रां) के पंचायत घर परिसर में घटित अत्यंत निंदनीय, अमानवीय तथा गंभीर आपराधिक घटना के विस्तृत घटनाक्रम के अनुसार, दिनांक 16 जुलाई 2026 को दोपहर लगभग 12:10 बजे पीड़ित प्रमोद कुमार पुत्र श्री कुंदन लाल (उम्र लगभग 53 वर्ष), निवासी गांव व डाकघर बीदडवाल, तहसील हरोली, जिला ऊना (हिमाचल प्रदेश), जो कि भंजड़ा (अनुसूचित जाति) समुदाय से संबंध रखते हैं, अपनी आधिकारिक शासकीय जिम्मेदारी के तहत पंचायत घर क्षेत्रां के अंदर पूरी निष्ठा के साथ चौकीदार के पद पर ड्यूटी पर तैनात थे, तभी उसी दौरान वार्ड नंबर 01 का वार्ड पंच कुलदीप कुमार पुत्र श्री रमेश चंद नशीली वस्तु (जर्दा/तंबाकू) का सेवन करते हुए अनाधिकृत एवं अभद्र रूप से पंचायत कार्यालय के भीतर दाखिल हुआ, जिस पर ऑन-ड्यूटी पंचायत चौकीदार प्रमोद कुमार ने बेहद शालीनता एवं अपने पदीय दायित्व का निर्वहन करते हुए आरोपी को पंचायत घर के अंदर नशीली वस्तु का सेवन करने तथा अनुशासनहीनता फैलाने से रोका, लेकिन इस जायज रोक-टोक से बौखलाकर आरोपी कुलदीप कुमार ने आपा खो दिया और बिना किसी उकसावे के अचानक अत्यंत आक्रामक होकर ऑन-ड्यूटी कर्मचारी प्रमोद कुमार के साथ गाली-गलौज व मारपीट शुरू कर दी, जिसमें आरोपी ने पीड़ित को लात-थप्पड़ों से बेदर्दी से पीटते हुए विशेष रूप से उनकी बाईं बाजू को निशाना बनाकर गंभीर चोटें पहुंचाईं—यह जानते हुए भी कि पीड़ित की बाईं बाजू में पूर्व में हुए एक गंभीर फ्रैक्चर के कारण मेडिकल रॉड (सर्जिकल रॉड) पड़ी हुई है, जिसके परिणामस्वरूप अत्यधिक प्रहार के कारण उनकी वह बाजू पूरी तरह से हिल गई और वे असहनीय दर्द से कराह उठे, और इसी दौरान आरोपी ने सरेआम जातिसूचक एवं अत्यंत अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करते हुए पीड़ित की जातिगत पहचान का मज़ाक उड़ाया और कहा कि “तू भंजडा है, तू मुझे नहीं रोक सकता” तथा सरेआम जलील कर गंभीर मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना दी एवं भविष्य में जान से खत्म करने की प्रत्यक्ष धमकियां भी दीं; इस पूरी शर्मनाक एवं आपराधिक घटना के दौरान मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों जैसे रोशन लाल (पुत्र श्री जगदेव सिंह) ने हस्तक्षेप कर पीड़ित को आरोपी के चंगुल से बचाया, जबकि आरोपी कुलदीप कुमार पीड़ित को भविष्य में किसी भी प्रकार से नुकसान पहुंचाने और जान से मार देने की खुली धमकी देते हुए मौके से फरार हो गया, हालांकि यह पूरी घटना पंचायत कार्यालय परिसर में स्थापित सीसीटीवी कैमरों में भी दर्ज हो गई; घटना के तुरंत बाद जब पीड़ित प्रमोद कुमार अपनी शिकायत दर्ज कराने हेतु ग्राम पंचायत प्रधान के साथ हरोली पुलिस थाने पहुंचे, तो पुलिस प्रशासन की अत्यंत निराशाजनक व उदासीन कार्यप्रणाली देखने को मिली, जहाँ पंचायत प्रधान के साथ मौजूद रहने के बावजूद पुलिस द्वारा पीड़ित की प्राथमिक सूचना (FIR) दर्ज नहीं की गई और पीड़ित को बिना किसी ठोस वजह के लगभग 4 घंटे तक थाने में ही बिठाकर रखा गया, जिसके पश्चात मामले की सूचना मिलने पर NCDHR (राष्ट्रीय दलित मानवाधिकार अभियान) के राज्य महासचिव राज महें ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए हरोली थाने के मुंशी को फोन कर पुलिस की लापरवाही पर कड़ा एतराज जताया और सख्त हिदायत दी, जिसके दबाव के बाद ही पुलिस प्रशासन हरकत में आया और तब जाकर रात लगभग 7:37 बजे पीड़ित प्रमोद कुमार की आधिकारिक प्राथमिकी दर्ज की जा सकी; घटनाक्रम का यह पक्ष अत्यंत चिंताजनक एवं संवेदनशील है कि पीड़ित प्रमोद कुमार के ऊपर पूर्व में वर्ष 2019 में भी तलवारों व धारदार हथियारों से जानलेवा हमला हो चुका है, जिसमें वे चमत्कारिक रूप से बाल-बाल बचे थे, और अब वर्ष 2026 में ऑन-ड्यूटी के दौरान एक जनप्रतिनिधि (वार्ड पंच) द्वारा उन पर पुनः हमला किया गया यह हिंसक व बर्बर हमला उनके जीवन की सुरक्षा के लिए एक अत्यंत गंभीर खतरा पैदा करता है और यह घटना न केवल संवैधानिक मर्यादाओं का खुला उल्लंघन है बल्कि संपूर्ण समाज व प्रशासनिक व्यवस्था के लिए भी बेहद निंदनीय एवं चिंताजनक है; इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए NCDHR (राष्ट्रीय दलित मानवाधिकार अभियान) की राज्य स्तरीय फैक्ट फाइंडिंग टीम ने राज्य महासचिव राज महें की अगुवाई में बीदडवाल पंचायत घर का दौरा कर मौका-ए-वारदात का गहन निरीक्षण किया, गवाहों के बयान दर्ज किए और पुलिस थाना हरोली में दर्ज प्राथमिकी संख्या 0091/2026 (धारा 3(1)(r), 3(1)(s) अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम तथा धारा 115(2), 351(3) भारतीय न्याय संहिता) के तहत त्वरित एवं निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए आरोपी वार्ड पंच कुलदीप कुमार को तत्काल प्रभाव से उसके पद से निष्कासित करने, उसकी शीघ्र गिरफ्तारी सुनिश्चित करने तथा पीड़ित एवं उनके परिवार को पर्याप्त पुलिस सुरक्षा व कानूनी न्याय प्रदान करने की पुरजोर सिफारिश की है।
यह घटना हिमाचल प्रदेश के जिला ऊना के गांव संतोषगढ़ की है और यह गांव जिला मुख्यालय से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस गांव के वार्ड नंबर 3 के निवासी मदनलाल, जो कि अनुसूचित जाति (चमार जाति) से संबंध रखते हैं तथा पेशे से एक साधारण दुकानदार हैं, का 15 वर्षीय बेटा रामदयाल सनातन धर्म एसडी (सनातम धर्म) पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल, संतोषगढ़ में पहली कक्षा से लेकर दसवीं कक्षा तक का एक अत्यंत अनुशासित, ईमानदार व होनहार छात्र रहा है। आज दिन तक स्कूल प्रशासन द्वारा मदनलाल को रामदयाल के आचरण या पढ़ाई के विषय में कभी कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई थी। परंतु 20 मई 2026 को अचानक मदनलाल को फोन पर सूचना मिली कि उनके बेटे का नाम स्कूल से काट दिया गया है। जब वे तुरंत स्कूल पहुँचे, तो उन्होंने देखा कि उनके बेटे को एक अन्य प्रवासी लड़के के साथ क्लास से बाहर खड़ा किया गया था। स्कूल के अनुशासन का सम्मान करते हुए मदनलाल ने आवेश में आकर अपने ही बेटे को दो थप्पड़ लगा दिए। तत्पश्चात जब वे प्रधानाचार्य (प्रिंसिपल) के कक्ष में मिलने गए, तो प्रधानाचार्य ने उनके साथ अत्यंत अभद्र भाषा का प्रयोग किया तथा बिना किसी सबूत, लिखित शिकायत या ठोस आधार के 10वीं कक्षा के इस मासूम छात्र पर "गैंगस्टर" व "गुंडा" जैसे गंभीर व झूठे आरोप लगा दिए। लाचार पिता ने प्रधानाचार्य के पैर पकड़कर मिन्नतें कीं और बार-बार प्रार्थना की कि यदि उनके बेटे की कोई गलती है तो उसका लिखित प्रमाण या सीसीटीवी फुटेज दिखाया जाए, लेकिन प्रधानाचार्य ने कोई भी प्रमाण देने से साफ मना कर दिया और केवल मौखिक आरोप लगाते रहे। इसके बाद जब मदनलाल ने स्कूल के अन्य बच्चों व अभिभावकों से बातचीत की, तो किसी ने भी रामदयाल के खिलाफ कोई शिकायत होने की बात नहीं कही। इस घटनाक्रम के तुरंत बाद स्कूल में एक महीने की छुट्टियां हो गईं। छुट्टियां समाप्त होने के उपरांत भी पीड़ित पिता मदनलाल लगातार प्रधानाचार्य से मिलकर बच्चे के उज्ज्वल भविष्य और पढ़ाई के नुकसान की दुहाई देकर उसे वापस दाखिला देने की गुहार लगाते रहे, परंतु प्रधानाचार्य अपने अड़ियल एवं रसूखदार रवैये पर अड़े रहे और उसे 10वीं जैसी महत्वपूर्ण बोर्ड कक्षा में वापस लेने से साफ मना कर दिया। स्कूल प्रशासन की इस मनमानी, अनुचित व पक्षपातपूर्ण कार्रवाई से हताश होकर तथा छात्र के भविष्य को बर्बाद होने से बचाने हेतु पीड़ित पिता द्वारा इस पूरे घटनाक्रम और प्रधानाचार्य के रवैये को लेकर जिला उपायुक्त महोदय, ऊना को 14 जुलाई को एक लिखित शिकायत पत्र सौंपा गया।
In Bochanahalli village, Koppal Taluk, Koppal District, on 26 June 2026, people from all communities had gathered to celebrate the occasion of Moharram together. During the celebrations, a person belonging to the Kuruba community, who was allegedly under the influence of alcohol, stumbled and fell onto members of the Scheduled Caste (Madiga community).
At that time, Yamanappa, a member of the Madiga community, said, "Why are you drunk and falling onto our boys? Please go over there." Following this, a verbal altercation broke out between members of the Madiga community and people from other communities present at the celebration. After the argument, the members of the Madiga community returned to their homes.
On the following day, 27 June 2026, members of the Muslim, Kuruba, Achari, and Uppara communities and mainly Valmiki communities allegedly gathered together and surrounded the Madiga locality (Scheduled Caste street), shouting loudly. Hearing the commotion, two 16-year-old boys from the Madiga community came out of their house to see what was happening. They were allegedly assaulted by members of the other communities.
At the same time, other residents of the Madiga community who came outside to find out the reason for the disturbance were also allegedly assaulted. It is alleged that Mansoor, along with others and of his own volition, physically attacked and beat the members of the Madiga community.