
SMS Help line to Address Violence Against Dalits and Adivasis in India
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यह घटना जिला ऊना, के गाँव नंगल सलांगडी की दलित युवती की है, पीड़िता मीनाक्षी, पुत्री श्री जोगराज, आयु 26 वर्ष, जाति चमार, निवासी गांव व डाकघर नंगल सलांगड़ी, तहसील व जिला ऊना (हिमाचल प्रदेश), जो कि पंजाब नेशनल बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (PNB RSETI) ऊना में नवंबर 2024 से कार्यालय सहायक (Office Assistant) के पद पर कार्यरत हैं और जिनका इस संस्थान के साथ पुराना प्रशिक्षण व कार्य का अनुभव रहा है, उनके साथ संस्थान में शामिल होने के समय से ही निदेशक सुधीर शर्मा, वरिष्ठ कार्यालय सहायक हीना डोगरा तथा फैकल्टी रजनी बाला द्वारा योजनाबद्ध तरीके से घोर जातिगत भेदभाव, मानसिक उत्पीड़न, शारीरिक हमले का प्रयास, अपमानजनक भाषा का प्रयोग तथा पदीय शक्तियों का दुराचार किया जाता रहा है, जिसमें मीनाक्षी के अनुसूचित जाति (चमार) से संबंध रखने के कारण उनके साथ संस्थान के भीतर छुआछूत जैसी अमानवीय प्रवृत्तियों का पालन करते हुए उनका पानी पीने का गिलास तक पूरी तरह से अलग रखा गया तथा कार्यालय परिसर में स्थापित संविधान निर्माता परम पूज्य बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर जी की तस्वीर को भी दीवार से हटवा दिया गया ताकि पीड़िता को निरंतर उसकी जातिगत पृष्ठभूमि का एहसास कराकर नीचा दिखाया जा सके। संस्थान के निदेशक सुधीर शर्मा तथा हीना डोगरा द्वारा पीड़िता को शासकीय वाहनों में यात्रा के दौरान तथा कार्यालय के दैनिक कार्यों में हर छोटी-बड़ी बात, प्रिंटआउट निकालने, पत्रावली संभालने और फॉलो-अप रिपोर्ट तैयार करने के नाम पर बिना किसी कारण के रोका जाता, डांटा जाता तथा सार्वजनिक रूप से अपमानित करके उनका मानसिक शोषण किया जाता था, और जब भी मीनाक्षी अपने पदीय दायित्वों के तहत निष्पक्षता से कार्य करने का प्रयास करती थीं तो हीना डोगरा एवं रजनी बाला द्वारा उन्हें काम करने से रोका जाता था तथा एक अवसर पर हीना डोगरा द्वारा पीड़िता को थप्पड़ मारने तक का हिंसक प्रयास किया गया। दिनांक 10 अप्रैल 2025 तथा 11 अप्रैल 2025 को जब फैकल्टी रजनी बाला द्वारा प्रशिक्षणार्थियों के महत्वपूर्ण दस्तावेज एवं उपस्थिति रजिस्टर ताला-चाबी में छिपाकर रखे गए तथा फर्जी जन्मतिथि एवं अनुपस्थित रहने वाले अभ्यर्थियों के नाम रजिस्टर में दर्ज कराने का अनुचित दबाव बनाया गया, तब मीनाक्षी द्वारा नियम सम्मत कार्य करने पर रजनी बाला एवं हीना डोगरा ने चिल्लाते हुए कहा कि "हमको डायरेक्टर ने बोल रखा है कि फर्जी DOB या न आने वाले कैंडिडेट को रजिस्टर कर दो, तू हमारा क्या बिगाड़ लेगी," और दिनांक 14 अप्रैल 2025 को जब मीनाक्षी ने कार्यालय सहायक के रूप में अपने दैनिक शासकीय कर्तव्य का पालन करते हुए उम्मीदवारों का उपस्थिति रजिस्टर मांगा ताकि एमआईएस (MIS) पोर्टल पर बोर्डिंग अपडेट की जा सके, तो रजनी बाला ने बिना किसी व्यक्तिगत कारण के विवाद शुरू कर दिया और उपस्थिति रजिस्टर देने से मना करते हुए "Go Away" कहकर चिल्लाने लगीं तथा हीना डोगरा के साथ मिलकर हाथापाई एवं थप्पड़ मारने पर उतारू हो गईं, जिसके उपरांत रजनी बाला ने आक्रामक होकर कार्यालय के कमरे में प्रवेश कर उपस्थिति रजिस्टर एवं प्रशिक्षणार्थियों के दस्तावेजों को फर्श पर फेंक दिया और पीड़िता को अपमानित करते हुए कहा कि "Put Them On Your Head"। इन गंभीर घटनाओं की लिखित शिकायत जब पीड़िता द्वारा निदेशक सुधीर शर्मा से की गई तो उन्होंने आरोपियों के विरुद्ध कानूनी एवं प्रशासनिक कार्रवाई करने के बजाय उल्टा आरोपी रजनी बाला व हीना डोगरा को पूर्ण संरक्षण प्रदान किया तथा संस्थान में तानाशाही रवैया अपनाते हुए पीड़िता को चुप रहने या परिणाम भुगतने की धमकियां दीं, जबकि संस्थान के भीतर महिला प्रशिक्षणार्थियों एवं महिला ट्रेनरों (जैसे निर्मला देवी, मनिंदर कौर, राज रानी, कृतिका, करिश्मा, नीलम सूद, वंदना, अनीता राणा आदि) का भी निदेशक सुधीर शर्मा द्वारा सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से ब्यूटी पार्लर एवं चेंजिंग रूम में निजता का उल्लंघन करके, अभद्र व द्विअर्थी शब्दावली का प्रयोग करके, पैसे रोकने तथा ब्लैकलिस्ट करने की धमकियां देकर व्यापक स्तर पर शोषण किया जा रहा था। इस निरंतर उत्पीड़न, जातिगत भेदभाव, शारीरिक व मानसिक यातना, तथा संस्थान के भीतर व्याप्त भय एवं असुरक्षा के वातावरण से व्यथित होकर पीड़िता मीनाक्षी द्वारा प्रशासनिक अधिकारियों (मुख्य प्रबंधक एचआरडी हमीरपुर, एलडीएम ऊना तथा राष्ट्रीय नियंत्रक RUDSETI बेंगलुरु) को लिखित शिकायतें प्रेषित की गईं एवं दिनांक 2 अगस्त को संबंधित महिला थाना में आरोपियों के विरुद्ध अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम तथा अन्य सुसंगत धाराओं के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई गई, ताकि इस गंभीर अपराध के दोषियों को दंडित कराया जा सके और पीड़िता को न्याय मिल सके।
यह घटना हिमाचल प्रदेश की तहसील हरोली के गांव जोड़ियाँ पूबोवाल की है और यह गांव जिला मुख्यालय ऊना से लगभग 40-50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. कुलवंत सिंह स्पुत्र स्व: बाबा जीत सिंह, आयु 43 वर्ष, अनुसूचित जाति (चमार जाति) से सम्बन्धित निवासी गांव जोड़ियाँ पूबोवाल, तहसील हरोली, जिला ऊना (हि०प्र०) का स्थाई निवासी है तथा 12 वर्ष की अल्पआयु से ही परम पूजनीय बाबा जीत सिंह जी द्वारा सौंपी गई जिम्मेदारी के तहत ऐतिहासिक 'डेरा बाबा जीत सिंह' (स्थान जोड़ियाँ पूबोवाल) की गुरुगद्दी पर आसीन होकर निष्ठापूर्वक धार्मिक दायित्वों, समाज सेवा व साध-संगत की सेवा संभाल रहा है तथा अपने व डेरे के जीवन-यापन हेतु डेरे से जुड़ी 105 कनाल भूमि पर खेती-बाड़ी व पशुपालन का कार्य करता है; इस पावन डेरे का मुख्य संपर्क मार्ग बालीवाल स्थित बालीवाल हाई स्कूल (मूलराज घंटी के स्कूल) के पास से होकर गुजरता है जो राजस्व विभाग के सरकारी कागजों व नक्शे में दर्ज स्वीकृत आम रास्ता है तथा सीमेंट/पक्के ब्लॉकों से बना हुआ है, परंतु ब्लॉक समाप्त होने वाले बिंदु से लेकर डेरे की सीमा तक जाने वाला लगभग 1 किलोमीटर का मार्ग अभी भी कच्चा है; घटना का सिलसिला तब शुरू हुआ जब स्थानीय स्टोन क्रेशर के संचालकों ने अपने निजी व व्यापारिक मुनाफे के लिए डेरे के आसपास तथा इस 1 किलोमीटर लंबे कच्चे मुख्य मार्ग के बिल्कुल पास भारी-भरकम जेसीबी व पोकलेन जैसी मशीनों से गैर-कानूनी व अंधाधुंध अवैध खुदाई शुरू कर दी, जिसके तहत क्रेशर के मुख्य मुंशियोमाडू (जाति जाट) ने भारी मशीनों का दुरुपयोग करके रास्ते के किनारों से जबरन मिट्टी उठवा ली और रास्ते के सुदृढ़ पक्के आधार व नींव को उखाड़ कर फेंक दिया, जिससे संपूर्ण मार्ग पर गहरे, खतरनाक व जानलेवा खड्डे बन गए. जब कुलवंत सिंह ने इस गैर-कानूनी कृत्य का विरोध किया और उक्त मुंशियों से शांतिपूर्वक बात करके रास्ते को न उखाड़ने व अवैध खुदाई रोकने का अनुरोध किया, तो मुंशियों ने पीड़ित की धार्मिक प्रतिष्ठा व अनुसूचित जाति पृष्ठभूमि की अवहेलना करते हुए अत्यंत उग्र व आक्रामक होकर उनके साथ तीखी बहसबाज़ी की, गाली-गलौज व अभद्र व्यवहार किया तथा उन्हें डरा-धमकाकर जबरन मिट्टी हटाने व रास्ते को नष्ट करने का कार्य जारी रखा, जो कि अनुसूचित जाति के एक धार्मिक स्थल के सेवादार पर किया गया सीधा मानसिक व सामाजिक अत्याचार (Atrocity) है. घटनाक्रम का सबसे दुखद व खौफनाक मोड़ तब आया जब क्रेशर वालों द्वारा रास्ते के समीप बनाए गए इन गहरे-गहरे खड्डों व कीचड़युक्त दलदल में पीड़ित की कई दुधारू व दूध देने वाली गायें अचानक गिर गईं और पानी व दलदल में डूबने के कारण उनकी असमय दर्दनाक मृत्यु हो गई, जिससे पीड़ित को भारी व्यक्तिगत, आर्थिक, मानसिक व धार्मिक आघात पहुँचा तथा उनकी आजीविका व पशुपालन का स्रोत पूरी तरह नष्ट हो गया; इसके उपरांत जब स्थानीय ग्रामीणों में इस तबाही को लेकर भारी आक्रोश पनपा, तो ग्रामीणों के उग्र विरोध के दबाव में आकर दिनांक 25 जून 2025 को क्रेशर संचालकों व उक्त तीनों मुंशियों ने जेसीबी लगाकर रास्ते की केवल नाममात्र ऊपर-ऊपर से मरम्मत करने का दिखावा किया, परंतु इसके तुरंत बाद उन्होंने अपनी हरकतें बंद नहीं कीं और व्यापारिक लाभ के लिए दिन-रात मिट्टी हटाने व अवैध खुदाई का सिलसिला बदस्तूर जारी रखा, जिसके परिणामस्वरूप वर्तमान समय में रास्ता इस कदर उखड़ व तबाह हो चुका है कि वहाँ से वाहनों का गुजरना तो दूर, सामान्य मनुष्यों का पैदल चलना भी पूरी तरह दुश्वार व जानलेवा हो गया है; इस प्रकार क्रेशर संचालकों व उनके तीनों मुंशियों द्वारा षड्यंत्रपूर्वक रास्ते को उखाड़कर और दलदल में तब्दील करके डेरा बाबा जीत सिंह का संपर्क मार्ग पूरी तरह से काट दिया गया है, जिससे प्रतिदिन दूर-दराज के राज्यों दिल्ली, हरियाणा, पंजाब व हिमाचल से आने वाले हज़ारों श्रद्धालुओं, वृद्धों, महिलाओं व बच्चों का आवागमन पूरी तरह बंद व ठप हो गया है, विशेषकर आगामी मानसूनी बरसात के दौरान पानी भर जाने से डेरा पूरी तरह से अलग-थलग पड़ जाएगा; यद्यपि पीड़ित द्वारा ग्रामीणों के हस्ताक्षर युक्त सहमति-पत्र व फाइलें भी तैयार करवा ली गई हैं, परंतु आरोपियों की इस हठधर्मिता, जबरन मिट्टी उठाने, रास्ते को उखाड़ने, दलित गद्दीनशीन के साथ बहसबाज़ी व अत्याचार करने और गायों की मौतों से क्षेत्र में भारी जन-आक्रोश व्याप्त है; अतः इस संपूर्ण घटनाक्रम का निष्पक्ष विश्लेषण करते हुए यह स्पष्ट होता है कि आरोपियों द्वारा योजनाबद्ध तरीके से सार्वजनिक रास्ते की नाकेबंदी करके धार्मिक स्थल की आवाजाही को बंद किया गया है तथा पीड़ित के अधिकारों का हनन किया गया है, जिसके आलोक में ब्लॉक खत्म होने वाले बिंदु से डेरे तक के इस 1 किलोमीटर रास्ते को अविलंब पक्का करवाया जाना एवं दोषी मुंशियों व क्रेशर संचालकों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई किया जाना अत्यंत न्यायसंगत, आवश्यक व न्यायहित में है।
The incident took place in Madhuban village, under the jurisdiction of the Madhuban police station in the East Champaran district of Bihar. On July 21, 2026, influential locals launched a life-threatening, armed attack on the victim, Pinki Devi (wife of the late Vinod Ram), and her 17-year-old son, Kanhaiya Kumar. The assailants hurled caste-based slurs at the victims and inflicted severe, bloodied injuries during the assault, specifically fracturing the heads of both the mother and son. A case (Case No. 257/26) has been registered at the Madhuban police station. The incident stemmed from the fact that the assailant, Lalan Prasad, had illegally obtained the registration of land belonging to Pinki Devi and was attempting to forcibly occupy it—an action the victims had opposed. It is noteworthy that the victim belongs to a Scheduled Caste and is extremely poor; her husband is deceased. In contrast, the assailant is an influential and affluent individual belonging to a Backward Caste.
यह अत्यंत गंभीर, संवेदनशील एवं जातिगत उत्पीड़न से संबंधित घटना हिमाचल प्रदेश के जिला ऊना की ग्राम पंचायत भटोली की है, जहाँ की स्थाई निवासी श्रीमती चरणजीत कौर उर्फ रानी पत्नी श्री राम कुमार (आयु लगभग 42 वर्ष, अनुसूचित जाति-चमार समुदाय से संबंधित, शैक्षणिक योग्यता मात्र आठवीं पास) वर्तमान में पंजाब के नंगल स्थित सरकारी स्कूल, विभोर साहिब में सफाई सेवक के रूप में कार्यरत रहकर मात्र ₹3000/- प्रतिमाह के मामूली वेतन पर अपने और अपने 11वीं कक्षा में अध्ययनरत पुत्र का जीवन-यापन कर रही हैं, तथा चरणजीत का विवाह दिनांक 19 सितंबर 2023 को पारिवारिक सहमति व कानूनी प्रक्रिया के तहत नंगल कोर्ट में श्री राम कुमार (जो कि उच्च ब्राह्मण जाति से संबंध रखते हैं) के साथ संपन्न हुआ था, जिसमें दोनों पक्ष पूर्व से तलाकशुदा थे और चरणजीत के पति श्री राम कुमार एवं उनके स्वर्गीय पिता (चरणजीत के ससुर) ने चरणजीत तथा उसके पहली शादी से उत्पन्न बेटे को पूरे मान-सम्मान एवं सहर्ष भाव से अपनाया था, परंतु चरणजीत के इस अंतर्जातीय विवाह से उनके पड़ोस में रहने वाले व्यक्ति विश्व मोहन सुपुत्र श्री मंगत राम, आशु सुपुत्र श्री विश्व मोहन, शैली पत्नी श्री विश्व मोहन तथा चरणजीत की सगी जेठानी पूजा पत्नी श्री संजीव कुमार (जिसका पति विदेश में रहता है) अत्यंत रंजिशग्रस्त, द्वेषपूर्ण व नाखुश रहने लगे, और इस गहरी दुश्मनी एवं रंजिश की मुख्य वजह यह थी कि यदि चरणजीत के पति श्री राम कुमार अविवाहित रहते तो चरणजीत के ससुर जी की समस्त चल-अचल संपत्ति पर जेठानी पूजा और उसके परिवार का एकाधिकार हो जाता तथा वे उसे आसानी से हड़प लेते, किंतु चरणजीत और उसके पुत्र के वैधानिक रूप से परिवार में आ जाने के कारण उनकी संपत्ति हड़पने की नीयत नाकाम हो गई, जिसके परिणामस्वरूप आरोपी पूजा, विश्व मोहन, आशु और शैली ने एक राय होकर चरणजीत को उसके घर से बेदखल करने और मानसिक-शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने की नीयत से आए दिन जातिसूचक, अपमानजनक व ज़लील करने वाली भाषा का प्रयोग करना शुरू कर दिया, जहाँ वे चरणजीत को सार्वजनिक रूप से यह कहकर नीचा दिखाते कि "कहां से यह चमारी आ गई है" और "कहां से यह कुत्ता इस चमारी को ब्याह के ले आया है", इतना ही नहीं पड़ोसी विश्व मोहन ने एक आपराधिक षड्यंत्र के तहत अपने मकान की दीवार पर एक शक्तिशाली सीसीटीवी कैमरा (CCTV Camera) इस प्रकार जानबूझकर कोण (Angle) बनाकर स्थापित कर दिया जिसका सीधा फोकस चरणजीत और उनके पति के निजी शयनकक्ष (Bedroom) की ओर रहता है, जिसकी अत्यधिक तेज फ्लैशलाइट पूरी रात चरणजीत के कमरे के भीतर आती है जिससे चरणजीत एवं उनके पति की वैवाहिक गोपनीयता, निजता (Privacy) और मौलिक अधिकारों का सीधा हनन होता है, तथा जब चरणजीत और उनके पति ने इस संबंध में विश्व मोहन से अत्यंत सौहार्दपूर्ण ढंग से बातचीत कर कैमरे का रुख बदलने का आग्रह किया तो पूरा परिवार हिंसक व झगड़े पर आमादा हो गया, और इसी क्रम में दिनांक 16 जुलाई को जब चरणजीत ने पुनः सीसीटीवी कैमरा हटाने का विनम्र अनुरोध किया तो शैली पत्नी विश्व मोहन ने सरेआम गंदी, अश्लील और अभद्र गालियां देते हुए चिल्लाकर कहा कि "साली ने पांच-पांच खसम कर रखे हैं चमारी कहीं की" और विश्व मोहन ने खुलेआम जातिगत विद्वेष फैलाते हुए कहा कि "बहनचोद राम ने तो चमारी हमारे पड़ोस में ला रखी है", साथ ही आशु सुपुत्र विश्व मोहन ने चरणजीत और उनके परिवार को जान से मारने की प्रत्यक्ष धमकी दी, जिसकी बाबत चरणजीत व उनके पति ने स्थानीय ग्राम पंचायत भटोली के प्रधान श्री सतीश कुमार जी को एक लिखित शिकायत पत्र भी प्रस्तुत किया था, परंतु स्थानीय स्तर पर कोई ठोस कानूनी, प्रशासनिक या दंडात्मक कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई जिससे आरोपियों के हौसले और बुलंद हो गए, इसके अतिरिक्त चरणजीत की जेठानी पूजा ने अपने परिसर में अत्यंत हिंसक, आक्रामक एवं जानलेवा नस्ल के पिटबुल (Pitbull) एवं बुलटेरियर (Bull Terrier) जैसे खतरनाक कुत्ते पाल रखे हैं, और चूंकि चरणजीत के घर का शौचालय (Bathroom/Toilet) मूल रिहायशी घर से लगभग 10 से 20 मीटर की दूरी पर स्थित है जहाँ नित्य कर्म हेतु जाना अनिवार्य होता है, तो आरोपी पूजा जानबूझकर चरणजीत और उसके नाबालिग बेटे को गंभीर शारीरिक चोट पहुँचाने, कटवाने और खौफ के साए में रखकर घर छोड़ने पर मजबूर करने की दुर्भावना से उन खूंखार हिंसक कुत्तों को शौचालय जाने वाले रास्ते पर चरणजीत की तरफ खुला छोड़ देती है, जो सीधे काटने और झपटने के लिए दौड़ते हैं, जिसके कारण चरणजीत और उसके 11वीं कक्षा में पढ़ने वाले नाबालिग बच्चे का शौचालय तक जाना दुश्वार हो गया है तथा पूरा परिवार अपने ही घर में अत्यंत भय, खौफ और असुरक्षा के माहौल में जीने को मजबूर है, यहाँ यह तथ्य भी अत्यंत उल्लेखनीय एवं प्रासंगिक है कि दिनांक 5 अप्रैल 2026 को चरणजीत के पूज्य ससुर जी का स्वर्गवास हो गया था और अपनी मृत्यु से कुछ समय पूर्व उन्होंने चरणजीत को स्पष्ट रूप से सचेत व सतर्क करते हुए कहा था कि "मेरी बेटी, मुझे तुम्हारी जाति से कोई आपत्ति नहीं है, परंतु मेरे जाने के बाद मेरी बड़ी बहू पूजा और आस-पड़ोस के लोग तुम्हें जातिगत कारणों और संपत्ति के लालच में बहुत तंग करेंगे, इसलिए संभल कर रहना", और ससुर जी के देहांत के तुरंत बाद इन सभी नामजद आरोपियों (1. विश्व मोहन, 2. आशु, 3. शैली, 4. पूजा) का अत्याचार, उत्पीड़न और आपराधिक कृतृत्य चरम सीमा पर पहुँच गया है जहाँ वे एक सुनियोजित षड्यंत्र के तहत चरणजीत को अनवरत जातिसूचक गालियां देकर, हिंसक व खूंखार कुत्तों से जानलेवा हमला करवाने का प्रयास करके, सीसीटीवी कैमरे के माध्यम से निजता का हनन करके तथा सामाजिक-मानसिक प्रताड़ना देकर बेघर करने व संपत्ति हड़पने की नीयत से घर छोड़ने पर विवश कर रहे हैं, इस सारी घटना बारे NCDHR टीम की मदद से DSP अजय ठाकुर से मिला गया व इस घटना शिकायत कर दोषियों खिलाफ मामला दर्ज करवाया गया.