नाबालिग दलित छात्रा के साथ बलात्कार at Kodra (Code: HP/05-10-2026, Date: 23-Sep-2026 )

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Case Title

Case primary details

Case posted by NCDHR- NDMJ, Himachal Pradesh
Case code HP/05-10-2026
Case year 23-Sep-2026
Type of atrocity Rape
Whether the case is being followed in the court or not? No

Fact Finding

Fact finding date

Fact finding date Not recorded

Case Incident

Case Incident details

Case incident date 23-Sep-2026
Place Village: Not recorded
Taluka:Not recorded
District: UNA(DP)
State: Himachal Pradesh
Police station BANGANA
Complaint date 02-Oct-2026
FIR date 02-Oct-2026

Case brief

Case summary

      यह घटना जिला बिलासपुर की तहसील झंडूता के गांव बुखर की है, जहां अनुसूचित जाति की चमार जाति से ताल्लुक रखने वाली पल्लवी, सुपुत्री विजय कुमार रहती है, जिसकी उम्र 13 वर्ष है और वह राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला कोडरा में नौवीं कक्षा की छात्रा है। पल्लवी के पिता विजय कुमार एक गरीब मजदूर हैं, जो दिन-रात दिहाड़ी मजदूरी करके अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। पल्लवी कुल चार भाई-बहन हैं, जिनमें पल्लवी के अलावा उसकी दो अन्य छोटी बहनें हैं—एक बहन प्रियंका आठवीं कक्षा में पढ़ती है, दूसरी बहन पांचवीं कक्षा में पढ़ती है, और सबसे छोटा भाई दूसरी कक्षा का छात्र है, जबकि पल्लवी स्वयं नौवीं कक्षा में अध्ययनरत है। बुखर गांव में चमार जाति के लगभग 150 के करीब घर हैं और इस पूरे गांव में मुख्य रूप से अनुसूचित जाति (SC) समुदाय के ही लोग निवास करते हैं, जिनमें से मात्र दो घर ब्राह्मण जाति के और एक घर कोली (SC) जाति का है। गांव बुखर के लिए मुख्य सड़क से आने-जाने का रास्ता बिल्कुल कच्चा है तथा बस सुविधा की अनुकूलता के कारण ही परिवार ने अपनी बच्चियों को पढ़ने के लिए नजदीकी सरकारी स्कूल कोडरा में दाखिल करवाया था, जो कि तहसील बंगाणा, जिला ऊना (हिमाचल प्रदेश) के तहत पड़ता है। घटना के दिन, यानी FIR दर्ज (2.10.26) से करीब 10 दिन पूर्व (दिन व तारीख ठीक से याद न होने के कारण), दोपहर करीब 3:00 बजे जब स्कूल की छुट्टी हुई, तब पीड़िता पल्लवी अपनी छोटी बहन प्रियंका के साथ स्कूल गेट से थोड़ी ही दूरी पर स्थित एक दुकान पर गई। यह दुकान कुरकुरे, नमकीन, बिस्कुट और स्टेशनरी आदि सामान की है, जिसे अश्वनी कुमार (निवासी गांव कोडरा, तहसील बंगाणा, जिला ऊना) नामक व्यक्ति चलाता है। जब दोनों बहनें दुकान पर पेन व कॉपी लेने गईं और उन्होंने दुकानदार अश्वनी से पेन मांगा, तो उसने यह बहाना बनाया कि पेन उसके पास नहीं है और उन्हें दुकान के अंदर से खुद पेन ले लेने को कहा। जब पीड़िता और उसकी बहन दुकान से बाहर निकलने लगीं, तभी अचानक दुकानदार अश्वनी कुमार ने पीड़िता पल्लवी का हाथ पकड़ लिया और उसे जबरन खींचकर दुकान के साथ बने कमरे में ले गया तथा तुरंत अंदर से कमरे की कुंडी लगा दी। कमरे के अंदर सोफा पड़ा हुआ था, जहां आरोपी ने पीड़िता को जोर से धक्का दिया जिससे वह सोफे पर गिर पड़ी, और फिर आरोपी ने उसे सोफे पर जबरन लिटा दिया। इसके बाद आरोपी ने स्वयं अपने कपड़े उतार दिए और पीड़िता को जान से मारने की सीधी धमकी देते हुए कहा कि यदि उसने शोर मचाया तो वह उसे खत्म कर देगा। इस भयानक खौफ और दबाव के चलते आरोपी ने पीड़िता के सारे कपड़े जबरदस्ती उतार दिए और उसके साथ घोर दुष्कर्म (गलत काम) किया। दुष्कर्म करने के उपरांत भी आरोपी शांत नहीं हुआ और लगभग 20 मिनट तक पीड़िता के साथ गंभीर अश्लील हरकतें करता रहा। पीड़िता के बयान के अनुसार, इस वारदात से पहले भी आरोपी कई बार उसके साथ छेड़छाड़ और अश्लील हरकतें कर चुका था, परंतु लोक-लाज, भय और आरोपी की धमकी के डर से पीड़िता ने यह बात अपने परिजनों को नहीं बताई थी। इसी दौरान बाहर अकेली खड़ी छोटी बहन प्रियंका जब काफी देर होने पर घबरा गई और उसने लगभग 20-25 मिनट बाद कमरे का दरवाजा खटखटाया, तब जाकर आरोपी अश्वनी ने कमरे की कुंडी खोली और पीड़िता रोते हुए बाहर निकल सकी। इसके बाद पीड़िता की छोटी बहन ने पूरी हिम्मत जुटाकर स्कूल में लगी शिकायत पेटी में एक शिकायत-पत्र डाला, जिसमें उसने साफ लिखा कि अश्वनी दुकानदार उसकी बहन को फ्री में चॉकलेट देता है और एक दिन उसे अपने कमरे में भी ले गया था। जब स्कूल के अध्यापकों ने शिकायत पेटी खोलकर इस पत्र को पढ़ा, तब शिक्षिका (मैडम) ने पीड़िता को अपने पास बुलाकर पूरी बात पूछी, जिस पर पीड़िता ने रोते हुए अपनी आपबीती शिक्षिका को बताई और घर जाकर अपनी माता को भी सारी आपबीती सुनाई। इस जघन्य घटना के बाद से पीड़िता अत्यधिक मानसिक सदमे और गहरे अवसाद में है, उसका स्कूल जाने का मन भी नहीं कर रहा है क्योंकि उसे लगातार डर सता रहा है कि आरोपी दोबारा उसे डरा-धमका कर गंदा काम कर सकता है। पीड़िता ने अपने माता-पिता के साथ थाना बंगाणा पहुंचकर धारा 173 BNSS के तहत अपना औपचारिक बयान दर्ज कराया, जिसके आधार पर पुलिस ने आरोपी दुकानदार अश्वनी कुमार के विरुद्ध बीएनएस की धारा 64, 351(2), 127(2) तथा पॉक्सो अधिनियम (POCSO Act) की धारा 4 के अंतर्गत अभियोग पंजीकृत कर कानूनी कार्रवाई अमल में लाई।

आरोपी अश्वनी कुमार सेना (Army) से एक रिटायर्ड फौजी है और साथ ही पंचायत सेक्रेटरी पद से भी सेवानिवृत्त है तथा वर्तमान में मौजूदा वार्ड पंच के पद पर भी काबिज है, जिसके चलते इलाके में उसका काफी रसूख और प्रभाव है। वह इससे पूर्व भी ऐसी घिनौनी वारदातों को अंजाम दे चुका है तथा आदतन दलित बच्चियों के साथ छेड़छाड़ जैसी हरकतों में संलिप्त रहा है। इससे पहले भी पीड़िता के ही गांव से अनुसूचित जाति (कोली समाज) की एक लड़की सहित दो अन्य दलित बच्चियों के साथ उसने छेड़छाड़ की थी, किंतु अपने पद, रसूख, पैसे के बल और जान से मारने की धमकियां देकर वह उन मामलों को रफा-दफा कर दबा चुका है, जिसके कारण भयभीत पीड़ित परिवारों द्वारा उस समय कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जा सकी थी। इसी बेखौफ और विकृत मानसिकता के चलते आरोपी ने इस बार पल्लवी के साथ इस जघन्य घटना को अंजाम दिया। वारदात के बाद भी आरोपी ने अपनी पुरानी फितरत के अनुसार पीड़िता के पिता विजय कुमार और पीड़ित परिवार पर राजीनामा (समझौता) करने के लिए भारी दबाव बनाया, पैसे का प्रलोभन दिया और उन्हें लगातार प्रेशराइज किया। इसके अलावा, पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर में इतने गंभीर मामले और स्पष्ट जातिगत पृष्ठभूमि के बावजूद अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (SC/ST Act) की धाराएं शामिल नहीं की गई हैं, जिसे जोड़ने के लिए पीड़ित परिवार की ओर से पुलिस प्रशासन को एक औपचारिक लिखित प्रार्थना-पत्र सौंपकर सख्त कानूनी कार्रवाई और न्याय की मांग की गई है।

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