
SMS Help line to Address Violence Against Dalits and Adivasis in India
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| Case posted by | NCDHR- NDMJ, Himachal Pradesh |
| Case code | HP/27-10-2026 |
| Case year | 24-Oct-2026 |
| Type of atrocity | Ransacking of house hold items and destruction of movable and immovable property |
| Whether the case is being followed in the court or not? | No |
| Fact finding date | Not recorded |
| Case incident date | 24-Oct-2026 |
| Place | Village: Not recorded Taluka:Not recorded District: UNA(DP) State: Himachal Pradesh |
| Police station | BANGANA |
| Complaint date | 27-Oct-2026 |
| FIR date | 01-Jan-1970 |
यह घटना हिमाचल प्रदेश के जिला ऊना की तहसील बंगाणा के अंतर्गत पड़ने वाली ग्राम पंचायत चमीआड़ी के गाँव रछोह की है, जहाँ अनुसूचित जाति (चमार समुदाय) से संबंध रखने वाला पीड़ित परिवार निवास करता है, जिसकी प्रार्थी 27 वर्षीय बिम्बो कुमारी सुपुत्री श्री उत्तम चंद हैं। इस पूरे विवाद की मुख्य जड़ यह है कि पीड़ित परिवार के आवासीय मकान के ठीक पिछले हिस्से (बैकग्राउंड) में पड़ोसी पक्ष की पशुशाला व भूमि स्थित है, जहाँ पड़ोसियों द्वारा पूर्व में पीड़ित की निजी मलकीयती भूमि (खसरा नं. 417) के दायरे में जबरन अपना डंगा लगा दिया गया था, जो डंगा इसी वर्ष बरसात के दौरान करीब 18 अगस्त को अचानक ढह गया और ढहने के कारण पीड़ित परिवार के मकान की दीवार तथा खिड़की पर जाकर गिरा, जिससे मकान की दीवार में दरारें आ गईं, खिड़की पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और मकान को व्यापक आर्थिक व ढांचागत नुकसान पहुँचा। इस घटना के बाद जब आरोपी पक्ष—स्वर्गीय प्रकाश चंद के पुत्र अक्षय कुमार व वनीत कुमार, जो स्थानीय राजपूत समुदाय से संबंध रखते हैं—ने उसी स्थान पर पुनः अपनी पशुशाला व मकान की सुरक्षा की आड़ में पीड़ित परिवार की ही जमीन पर जबरन नया डंगा लगाने की कोशिश शुरू की, तो पीड़ित परिवार ने साफ तौर पर कहा कि वे अपनी जमीन में पीछे हटकर डंगा लगाएँ तथा सीमा को लेकर यदि कोई संशय है तो पहले सक्षम राजस्व विभाग से विधिवत निशानदेही करवाई जाए और निशानदेही में जो सीमा तय होगी उसी के अनुसार निर्माण किया जाए, परंतु आरोपी पक्ष अपनी मनमानी और दबंगई पर आमादा रहा और इसी बात की रंजिश रखते हुए उन्होंने पीड़ित परिवार पर दबाव बनाने के लिए उनका मुख्य आवागमन का रास्ता रोकने का षड्यंत्र रचा। उल्लेखनीय है कि आरोपियों द्वारा यह उत्पीड़न नया नहीं है, बल्कि पूर्व में भी दिनांक 29 अगस्त 2026 को उत्तम चंद द्वारा माननीय उपायुक्त महोदय को दी गई शिकायत में स्पष्ट उल्लेख किया गया था कि आरोपियों द्वारा पहले भी रास्ते में कांटेदार झाड़ियाँ फेंककर और पीड़ित के मकान के साथ छोटा खड्डा खोदकर तथा सारा मलबा आम रास्ते पर डालकर पानी और आवाजाही को बाधित किया जा रहा था तथा जान-माल की धमकियाँ दी जा रही थीं, लेकिन उस समय स्थानीय पुलिस व पंचायत स्तर पर कोई ठोस निवारक कार्रवाई न होने के कारण आरोपियों के हौसले इतने बढ़ गए कि दिनांक 24 अक्टूबर 2026 को दोपहर लगभग 1:30 बजे उन्होंने सरेआम जेसीबी मशीन मंगवाकर मुख्य सड़क से पीड़ित परिवार के घर को जोड़ने वाले लगभग 30 मीटर के एकमात्र आम पैदल रास्ते पर सड़क के बिल्कुल किनारे एक बड़ा व गहरा खड्डा खुदवा दिया। कानूनी नियमों के अनुसार सड़क के बिल्कुल साथ व सड़क नियंत्रण सीमा के अंतर्गत इस प्रकार कोई भी अनाधिकृत व खतरनाक खुदाई नहीं की जा सकती, क्योंकि वह सार्वजनिक व सड़क संबंधी नियमों का सीधा उल्लंघन है, परंतु आरोपियों ने सरासर गैरकानूनी तरीके से यह भारी खड्डा खोदकर पीड़ित परिवार का मुख्य मार्ग पूरी तरह से अवरुद्ध कर दिया और साफ धमकी दी कि जब तक उन्हें पीड़ित की जमीन में डंगा नहीं लगाने दिया जाएगा, तब तक वे रास्ता नहीं खोलेंगे, साथ ही विरोध करने पर पूरे परिवार को घर से बेघर करने तथा जान से मारने की गंभीर धमकियाँ दीं। इस अमानवीय कृत्य से प्रार्थी बिम्बो कुमारी और उनके पूरे परिवार की दैनिक आवाजाही, राशन, आपातकालीन चिकित्सा सेवा व जीवन-यापन पूरी तरह ठप होकर संकट में पड़ गया है, जिसके चलते अब एक संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने मिलकर माननीय जिला उपायुक्त महोदय ऊना तथा अनुसूचित जाति आयोग (SC Commission) को लिखित रूप से अवगत करवाते हुए पुरजोर मांग की है कि मौके पर तुरंत हस्तक्षेप कर सड़क किनारे खोदे गए इस अवैध खड्डे को बंद करवाकर अवरुद्ध रास्ते को बहाल करवाया जाए, राजस्व अधिकारियों द्वारा भूमि की निष्पक्ष निशानदेही सुनिश्चित की जाए तथा अनुसूचित जाति के इस गरीब परिवार को बंधक बनाकर प्रताड़ित करने व धमकाने वाले आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के अंतर्गत सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाए।