
SMS Help line to Address Violence Against Dalits and Adivasis in India
Type ATM < your message > Send to 9773904050
]
on dated 30-09-2025 Dominant Jat stoped to administration to keep Transfarmer, therefore two dalit faced water and elctricity crisis. administration ready to solve the crisis but jat accused not allaow. victims stated protest march with hunger strike. DC jind insured to solve the crisis on dated07-07-2026, therefore victim Sushil kumar removed the hunger strike.
On dated 06-06-2026 at approx. 6.30 Dalit minor girls doinr practice of Basketbal at Goverment school Manjura district karnal. yet 7-8 acccused reached there and start misbehave with coauch Ritu. they beat one's breast on victim Ritu. when others minor girls oppose this they started abused them and bed touch with Ritu. when they met with women commission they made compromise the case.
यह घटना जिला ऊना, के गाँव नंगल सलांगडी की दलित युवती की है, पीड़िता मीनाक्षी, पुत्री श्री जोगराज, आयु 26 वर्ष, जाति चमार, निवासी गांव व डाकघर नंगल सलांगड़ी, तहसील व जिला ऊना (हिमाचल प्रदेश), जो कि पंजाब नेशनल बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (PNB RSETI) ऊना में नवंबर 2024 से कार्यालय सहायक (Office Assistant) के पद पर कार्यरत हैं और जिनका इस संस्थान के साथ पुराना प्रशिक्षण व कार्य का अनुभव रहा है, उनके साथ संस्थान में शामिल होने के समय से ही निदेशक सुधीर शर्मा, वरिष्ठ कार्यालय सहायक हीना डोगरा तथा फैकल्टी रजनी बाला द्वारा योजनाबद्ध तरीके से घोर जातिगत भेदभाव, मानसिक उत्पीड़न, शारीरिक हमले का प्रयास, अपमानजनक भाषा का प्रयोग तथा पदीय शक्तियों का दुराचार किया जाता रहा है, जिसमें मीनाक्षी के अनुसूचित जाति (चमार) से संबंध रखने के कारण उनके साथ संस्थान के भीतर छुआछूत जैसी अमानवीय प्रवृत्तियों का पालन करते हुए उनका पानी पीने का गिलास तक पूरी तरह से अलग रखा गया तथा कार्यालय परिसर में स्थापित संविधान निर्माता परम पूज्य बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर जी की तस्वीर को भी दीवार से हटवा दिया गया ताकि पीड़िता को निरंतर उसकी जातिगत पृष्ठभूमि का एहसास कराकर नीचा दिखाया जा सके। संस्थान के निदेशक सुधीर शर्मा तथा हीना डोगरा द्वारा पीड़िता को शासकीय वाहनों में यात्रा के दौरान तथा कार्यालय के दैनिक कार्यों में हर छोटी-बड़ी बात, प्रिंटआउट निकालने, पत्रावली संभालने और फॉलो-अप रिपोर्ट तैयार करने के नाम पर बिना किसी कारण के रोका जाता, डांटा जाता तथा सार्वजनिक रूप से अपमानित करके उनका मानसिक शोषण किया जाता था, और जब भी मीनाक्षी अपने पदीय दायित्वों के तहत निष्पक्षता से कार्य करने का प्रयास करती थीं तो हीना डोगरा एवं रजनी बाला द्वारा उन्हें काम करने से रोका जाता था तथा एक अवसर पर हीना डोगरा द्वारा पीड़िता को थप्पड़ मारने तक का हिंसक प्रयास किया गया। दिनांक 10 अप्रैल 2025 तथा 11 अप्रैल 2025 को जब फैकल्टी रजनी बाला द्वारा प्रशिक्षणार्थियों के महत्वपूर्ण दस्तावेज एवं उपस्थिति रजिस्टर ताला-चाबी में छिपाकर रखे गए तथा फर्जी जन्मतिथि एवं अनुपस्थित रहने वाले अभ्यर्थियों के नाम रजिस्टर में दर्ज कराने का अनुचित दबाव बनाया गया, तब मीनाक्षी द्वारा नियम सम्मत कार्य करने पर रजनी बाला एवं हीना डोगरा ने चिल्लाते हुए कहा कि "हमको डायरेक्टर ने बोल रखा है कि फर्जी DOB या न आने वाले कैंडिडेट को रजिस्टर कर दो, तू हमारा क्या बिगाड़ लेगी," और दिनांक 14 अप्रैल 2025 को जब मीनाक्षी ने कार्यालय सहायक के रूप में अपने दैनिक शासकीय कर्तव्य का पालन करते हुए उम्मीदवारों का उपस्थिति रजिस्टर मांगा ताकि एमआईएस (MIS) पोर्टल पर बोर्डिंग अपडेट की जा सके, तो रजनी बाला ने बिना किसी व्यक्तिगत कारण के विवाद शुरू कर दिया और उपस्थिति रजिस्टर देने से मना करते हुए "Go Away" कहकर चिल्लाने लगीं तथा हीना डोगरा के साथ मिलकर हाथापाई एवं थप्पड़ मारने पर उतारू हो गईं, जिसके उपरांत रजनी बाला ने आक्रामक होकर कार्यालय के कमरे में प्रवेश कर उपस्थिति रजिस्टर एवं प्रशिक्षणार्थियों के दस्तावेजों को फर्श पर फेंक दिया और पीड़िता को अपमानित करते हुए कहा कि "Put Them On Your Head"। इन गंभीर घटनाओं की लिखित शिकायत जब पीड़िता द्वारा निदेशक सुधीर शर्मा से की गई तो उन्होंने आरोपियों के विरुद्ध कानूनी एवं प्रशासनिक कार्रवाई करने के बजाय उल्टा आरोपी रजनी बाला व हीना डोगरा को पूर्ण संरक्षण प्रदान किया तथा संस्थान में तानाशाही रवैया अपनाते हुए पीड़िता को चुप रहने या परिणाम भुगतने की धमकियां दीं, जबकि संस्थान के भीतर महिला प्रशिक्षणार्थियों एवं महिला ट्रेनरों (जैसे निर्मला देवी, मनिंदर कौर, राज रानी, कृतिका, करिश्मा, नीलम सूद, वंदना, अनीता राणा आदि) का भी निदेशक सुधीर शर्मा द्वारा सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से ब्यूटी पार्लर एवं चेंजिंग रूम में निजता का उल्लंघन करके, अभद्र व द्विअर्थी शब्दावली का प्रयोग करके, पैसे रोकने तथा ब्लैकलिस्ट करने की धमकियां देकर व्यापक स्तर पर शोषण किया जा रहा था। इस निरंतर उत्पीड़न, जातिगत भेदभाव, शारीरिक व मानसिक यातना, तथा संस्थान के भीतर व्याप्त भय एवं असुरक्षा के वातावरण से व्यथित होकर पीड़िता मीनाक्षी द्वारा प्रशासनिक अधिकारियों (मुख्य प्रबंधक एचआरडी हमीरपुर, एलडीएम ऊना तथा राष्ट्रीय नियंत्रक RUDSETI बेंगलुरु) को लिखित शिकायतें प्रेषित की गईं एवं दिनांक 2 अगस्त को संबंधित महिला थाना में आरोपियों के विरुद्ध अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम तथा अन्य सुसंगत धाराओं के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई गई, ताकि इस गंभीर अपराध के दोषियों को दंडित कराया जा सके और पीड़िता को न्याय मिल सके।
यह घटना हिमाचल प्रदेश की तहसील हरोली के गांव जोड़ियाँ पूबोवाल की है और यह गांव जिला मुख्यालय ऊना से लगभग 40-50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. कुलवंत सिंह स्पुत्र स्व: बाबा जीत सिंह, आयु 43 वर्ष, अनुसूचित जाति (चमार जाति) से सम्बन्धित निवासी गांव जोड़ियाँ पूबोवाल, तहसील हरोली, जिला ऊना (हि०प्र०) का स्थाई निवासी है तथा 12 वर्ष की अल्पआयु से ही परम पूजनीय बाबा जीत सिंह जी द्वारा सौंपी गई जिम्मेदारी के तहत ऐतिहासिक 'डेरा बाबा जीत सिंह' (स्थान जोड़ियाँ पूबोवाल) की गुरुगद्दी पर आसीन होकर निष्ठापूर्वक धार्मिक दायित्वों, समाज सेवा व साध-संगत की सेवा संभाल रहा है तथा अपने व डेरे के जीवन-यापन हेतु डेरे से जुड़ी 105 कनाल भूमि पर खेती-बाड़ी व पशुपालन का कार्य करता है; इस पावन डेरे का मुख्य संपर्क मार्ग बालीवाल स्थित बालीवाल हाई स्कूल (मूलराज घंटी के स्कूल) के पास से होकर गुजरता है जो राजस्व विभाग के सरकारी कागजों व नक्शे में दर्ज स्वीकृत आम रास्ता है तथा सीमेंट/पक्के ब्लॉकों से बना हुआ है, परंतु ब्लॉक समाप्त होने वाले बिंदु से लेकर डेरे की सीमा तक जाने वाला लगभग 1 किलोमीटर का मार्ग अभी भी कच्चा है; घटना का सिलसिला तब शुरू हुआ जब स्थानीय स्टोन क्रेशर के संचालकों ने अपने निजी व व्यापारिक मुनाफे के लिए डेरे के आसपास तथा इस 1 किलोमीटर लंबे कच्चे मुख्य मार्ग के बिल्कुल पास भारी-भरकम जेसीबी व पोकलेन जैसी मशीनों से गैर-कानूनी व अंधाधुंध अवैध खुदाई शुरू कर दी, जिसके तहत क्रेशर के मुख्य मुंशियोमाडू (जाति जाट) ने भारी मशीनों का दुरुपयोग करके रास्ते के किनारों से जबरन मिट्टी उठवा ली और रास्ते के सुदृढ़ पक्के आधार व नींव को उखाड़ कर फेंक दिया, जिससे संपूर्ण मार्ग पर गहरे, खतरनाक व जानलेवा खड्डे बन गए. जब कुलवंत सिंह ने इस गैर-कानूनी कृत्य का विरोध किया और उक्त मुंशियों से शांतिपूर्वक बात करके रास्ते को न उखाड़ने व अवैध खुदाई रोकने का अनुरोध किया, तो मुंशियों ने पीड़ित की धार्मिक प्रतिष्ठा व अनुसूचित जाति पृष्ठभूमि की अवहेलना करते हुए अत्यंत उग्र व आक्रामक होकर उनके साथ तीखी बहसबाज़ी की, गाली-गलौज व अभद्र व्यवहार किया तथा उन्हें डरा-धमकाकर जबरन मिट्टी हटाने व रास्ते को नष्ट करने का कार्य जारी रखा, जो कि अनुसूचित जाति के एक धार्मिक स्थल के सेवादार पर किया गया सीधा मानसिक व सामाजिक अत्याचार (Atrocity) है. घटनाक्रम का सबसे दुखद व खौफनाक मोड़ तब आया जब क्रेशर वालों द्वारा रास्ते के समीप बनाए गए इन गहरे-गहरे खड्डों व कीचड़युक्त दलदल में पीड़ित की कई दुधारू व दूध देने वाली गायें अचानक गिर गईं और पानी व दलदल में डूबने के कारण उनकी असमय दर्दनाक मृत्यु हो गई, जिससे पीड़ित को भारी व्यक्तिगत, आर्थिक, मानसिक व धार्मिक आघात पहुँचा तथा उनकी आजीविका व पशुपालन का स्रोत पूरी तरह नष्ट हो गया; इसके उपरांत जब स्थानीय ग्रामीणों में इस तबाही को लेकर भारी आक्रोश पनपा, तो ग्रामीणों के उग्र विरोध के दबाव में आकर दिनांक 25 जून 2025 को क्रेशर संचालकों व उक्त तीनों मुंशियों ने जेसीबी लगाकर रास्ते की केवल नाममात्र ऊपर-ऊपर से मरम्मत करने का दिखावा किया, परंतु इसके तुरंत बाद उन्होंने अपनी हरकतें बंद नहीं कीं और व्यापारिक लाभ के लिए दिन-रात मिट्टी हटाने व अवैध खुदाई का सिलसिला बदस्तूर जारी रखा, जिसके परिणामस्वरूप वर्तमान समय में रास्ता इस कदर उखड़ व तबाह हो चुका है कि वहाँ से वाहनों का गुजरना तो दूर, सामान्य मनुष्यों का पैदल चलना भी पूरी तरह दुश्वार व जानलेवा हो गया है; इस प्रकार क्रेशर संचालकों व उनके तीनों मुंशियों द्वारा षड्यंत्रपूर्वक रास्ते को उखाड़कर और दलदल में तब्दील करके डेरा बाबा जीत सिंह का संपर्क मार्ग पूरी तरह से काट दिया गया है, जिससे प्रतिदिन दूर-दराज के राज्यों दिल्ली, हरियाणा, पंजाब व हिमाचल से आने वाले हज़ारों श्रद्धालुओं, वृद्धों, महिलाओं व बच्चों का आवागमन पूरी तरह बंद व ठप हो गया है, विशेषकर आगामी मानसूनी बरसात के दौरान पानी भर जाने से डेरा पूरी तरह से अलग-थलग पड़ जाएगा; यद्यपि पीड़ित द्वारा ग्रामीणों के हस्ताक्षर युक्त सहमति-पत्र व फाइलें भी तैयार करवा ली गई हैं, परंतु आरोपियों की इस हठधर्मिता, जबरन मिट्टी उठाने, रास्ते को उखाड़ने, दलित गद्दीनशीन के साथ बहसबाज़ी व अत्याचार करने और गायों की मौतों से क्षेत्र में भारी जन-आक्रोश व्याप्त है; अतः इस संपूर्ण घटनाक्रम का निष्पक्ष विश्लेषण करते हुए यह स्पष्ट होता है कि आरोपियों द्वारा योजनाबद्ध तरीके से सार्वजनिक रास्ते की नाकेबंदी करके धार्मिक स्थल की आवाजाही को बंद किया गया है तथा पीड़ित के अधिकारों का हनन किया गया है, जिसके आलोक में ब्लॉक खत्म होने वाले बिंदु से डेरे तक के इस 1 किलोमीटर रास्ते को अविलंब पक्का करवाया जाना एवं दोषी मुंशियों व क्रेशर संचालकों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई किया जाना अत्यंत न्यायसंगत, आवश्यक व न्यायहित में है।