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A Dalit minor girl was kidnapped by dominant people
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The incident took place in Balua Tola village, located within the jurisdiction of the Kundwa Chainpur police station in the East Champaran district of Bihar state. On September 29, 2026, Kumari Rupam (a pseudonym) went to school to study but did not return home. Despite an extensive search, her whereabouts could not be determined. The following day, it was learned that several individuals from her own village had abducted her with malicious intent and taken her elsewhere. Those involved include: 1. Md. Javed Alam, aged approximately 19, son of Aftab Alam; 2. Aftab Alam, aged approximately 50, son of Sheikh Maqsood Alam; 3. Md. Khalid, aged approximately 61, son of Sohaib Alam; 4. Layak Alam, aged approximately 20; and 5. Shabuddin Nesha, aged approximately 45, wife of Aftab Alam.
Upon receiving information, when the victim's father and other family members went to inquire, the family members of the abductors became aggressive and assaulted them. They also used caste-based slurs and subjected them to public humiliation. Subsequently, the abductors' family members pressured the victim's father not to file a legal case, promising to ensure the girl's recovery by October 2, 2026. However, the girl was not recovered by the promised date. Compelled by the situation, the victim's father submitted an application at the Kundwa Chaipur police station, leading to the registration of a case (Case No. 317/26) on October 3, 2026. To date, the girl has not been recovered, nor has any of the named accused been arrested. The police have shown a lack of sensitivity toward the matter.
यह घटना जिला ऊना की लोअर पंचायत बहडाला की है, जहाँ दलित समाज (अनुसूचित जाति) से संबंध रखने वाली ममता, पत्नी दिनेश कुमार, उम्र करीब 32 से 33 वर्ष, निवास करती हैं; ममता केवल पाँचवीं कक्षा तक पढ़ी-लिखी हैं और उनका मायका ग्राम बैरीणसीरपुर, तहसील आलापुर, जिला अम्बेडकर नगर, उत्तर प्रदेश में स्थित है। ममता के माता-पिता का बचपन में ही देहांत हो गया था, जिसके उपरांत उनका पालन-पोषण उनके परिवार द्वारा किया गया तथा उनकी शादी उनके मामा के लड़के ने पीएसीएल (PACL) कॉलोनी नया नंगल पंजाब के निवासियों के सामूहिक सहयोग से तय करवाई थी। पीएसीएल कॉलोनी के सभी लोगों ने एकत्र होकर पूरे रीति-रिवाज से विवाह का प्रबंध किया और दिनांक 3 मई 2022 को पीएसीएल कॉलोनी, नया नंगल स्थित प्राचीन शिव मंदिर में हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार अत्यंत आदर-सत्कार, टीके व समस्त पारंपरिक रस्मों को विधिवत अदा करते हुए उनका विवाह दिनेश कुमार, सुपुत्र सतपाल शर्मा, निवासी गाँव लोअर बहडाला, तहसील व जिला ऊना (हिमाचल प्रदेश) के साथ संपन्न कराया गया था। विवाह तय होते समय तथा फेरों के दौरान ससुराल पक्ष के लोगों ने पूर्ण सहमति व्यक्त करते हुए स्पष्ट कहा था कि उन्हें लड़की हर प्रकार से मंजूर व पसंद है, चाहे वह चमार जाति से ही क्यों न संबंध रखती हो, उन्हें इस अंतर्जातीय विवाह से कोई आपत्ति नहीं है। विवाह के पश्चात ममता अपने पति दिनेश कुमार के साथ ससुराल गाँव लोअर बहडाला में आकर रहने लगीं, जहाँ उनके पति दिनेश कुमार 'ऊना नंबर वन शराब देशी फैक्ट्री, मेहहतपुर' में मजदूरी व मेहनत का कार्य करके अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। शादी के शुरुआती दौर में माहौल सामान्य रहा, परंतु शादी के लगभग दो वर्ष बीत जाने के बाद ससुराल पक्ष के लोगों की नीयत और व्यवहार में भारी बदलाव आ गया तथा उन्होंने ममता को मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित व तंग करना शुरू कर दिया। ममता के ससुर सतपाल शर्मा, सास संदेश देवी तथा उनकी दो विवाहित ननदें पूनम व नेहा उनके साथ जातिगत भेदभाव और खुलेआम छुआछूत का व्यवहार करने लगीं। जब भी दोनों ननदें अपने मायके आती थीं, तो वे ममता को यह कहकर जलील व अपमानित करती थीं कि 'हम ऊँची जाति के ब्राह्मण हैं और तू नीच जात चमार से है', जिससे ममता की गरिमा, मान-सम्मान और भावनाओं को निरंतर ठेस पहुँचती रही। ननदों के उकसावे और बहकावे में आकर सास-ससुर ने भी घर में छुआछूत बरतना शुरू कर दिया और पिछले दो वर्षों से उन्होंने ममता के साथ एक जगह बैठकर भोजन करना बंद कर दिया तथा उसके हाथ से बना खाना खाने तक से इनकार कर दिया। चूंकि विवाह के इतने वर्ष बीत जाने के उपरांत भी कोई संतान उत्पन्न नहीं हुई थी, इसलिए ससुराल पक्ष के लोग तथा उनके सहयोगी ममता को लगातार 'बांझ' और 'चमार' कहकर ताने मारते, अपमानित करते और घर से निकालने की धमकियाँ देते रहे। इस पूरे विवाद, षड्यंत्र और कलह के पीछे मुख्य किरदार सोनिया राणा (पत्नी शंकर दास) का है, जिसके घर पर ममता के ससुर सतपाल शर्मा नियमित रूप से कार्य करते हैं, और सोनिया राणा ही अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके ममता को घर से बेदखल करवाने का सारा ताना-बाना बुन रही है। सोनिया राणा, प्रमोद सिंह उर्फ कालू (पुत्र गंधर्व सिंह) तथा कुलदीप सिंह (पुत्र प्रीतम सिंह) के बहकावे, उकसावे और प्रत्यक्ष दबाव में आकर ससुराल वालों ने ममता को घर से जबरन बाहर निकालने की पूरी साजिश रच डाली। इन सभी लोगों ने ममता के साथ झगड़ा व गाली-गलौज करते हुए उनका घरेलू सामान तक घर से बाहर निकालकर फेंकना शुरू कर दिया ताकि उन्हें बेघर व लाचार किया जा सके। मामला उस समय पराकाष्ठा पर पहुँच गया जब दिनांक 4 अक्टूबर 2026 को इन सभी आरोपियों—जिनमें सोनिया राणा, प्रमोद सिंह, कुलदीप सिंह, ससुर सतपाल शर्मा, सास संदेश देवी और ननदें शामिल थीं—ने सोनिया राणा के घर पर एकत्र होकर एक षड्यंत्रकारी बैठक की और वहाँ से लौटकर ममता को भद्दी-भद्दी गालियाँ दीं तथा सरेआम जाति-सूचक अपशब्द बोलते हुए कहा कि 'इस चमारी का इंतजाम हमने कर दिया है और अब इस बांझ चमारी को घर से धक्के मारकर बाहर निकालो।' यह समूचा अमानवीय व्यवहार, अपमान और जातिगत अत्याचार ममता के पति दिनेश कुमार की प्रत्यक्ष मौजूदगी में घटित हुआ, जिसके बाद उक्त आरोपियों ने ममता को जान से मार देने की सीधी धमकियाँ भी दीं। इस प्रकार लगातार हो रहे जातिगत उत्पीड़न, अमानवीय छुआछूत, सार्वजनिक अपमान, जानलेवा धमकी और घर से बेदखल करने की साजिशों से त्रस्त होकर प्रार्थिया ममता ने पुलिस अधीक्षक (SP) ऊना को विस्तृत शिकायत पत्र सौंपा, जिसके आधार पर थाना ऊना सदर में दिनांक 14 अक्टूबर 2026 को प्राथमिकी संख्या (FIR No.) 0284/2026 के अंतर्गत भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 85, 352, 351(2), 61(2) एवं अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) संशोधन अधिनियम, 1989/2015 की धारा 3(1)(r) व 3(1)(s) के तहत आरोपी सतपाल शर्मा, संदेश देवी, पूनम, नेहा, सोनिया राणा, प्रमोद सिंह उर्फ कालू और कुलदीप सिंह के विरुद्ध अभियोग पंजीकृत कर विधिक अनुसंधान प्रारंभ किया गया।
यह घटना जिला बिलासपुर की तहसील झंडूता के गांव बुखर की है, जहां अनुसूचित जाति की चमार जाति से ताल्लुक रखने वाली पल्लवी, सुपुत्री विजय कुमार रहती है, जिसकी उम्र 13 वर्ष है और वह राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला कोडरा में नौवीं कक्षा की छात्रा है। पल्लवी के पिता विजय कुमार एक गरीब मजदूर हैं, जो दिन-रात दिहाड़ी मजदूरी करके अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। पल्लवी कुल चार भाई-बहन हैं, जिनमें पल्लवी के अलावा उसकी दो अन्य छोटी बहनें हैं—एक बहन प्रियंका आठवीं कक्षा में पढ़ती है, दूसरी बहन पांचवीं कक्षा में पढ़ती है, और सबसे छोटा भाई दूसरी कक्षा का छात्र है, जबकि पल्लवी स्वयं नौवीं कक्षा में अध्ययनरत है। बुखर गांव में चमार जाति के लगभग 150 के करीब घर हैं और इस पूरे गांव में मुख्य रूप से अनुसूचित जाति (SC) समुदाय के ही लोग निवास करते हैं, जिनमें से मात्र दो घर ब्राह्मण जाति के और एक घर कोली (SC) जाति का है। गांव बुखर के लिए मुख्य सड़क से आने-जाने का रास्ता बिल्कुल कच्चा है तथा बस सुविधा की अनुकूलता के कारण ही परिवार ने अपनी बच्चियों को पढ़ने के लिए नजदीकी सरकारी स्कूल कोडरा में दाखिल करवाया था, जो कि तहसील बंगाणा, जिला ऊना (हिमाचल प्रदेश) के तहत पड़ता है। घटना के दिन, यानी FIR दर्ज (2.10.26) से करीब 10 दिन पूर्व (दिन व तारीख ठीक से याद न होने के कारण), दोपहर करीब 3:00 बजे जब स्कूल की छुट्टी हुई, तब पीड़िता पल्लवी अपनी छोटी बहन प्रियंका के साथ स्कूल गेट से थोड़ी ही दूरी पर स्थित एक दुकान पर गई। यह दुकान कुरकुरे, नमकीन, बिस्कुट और स्टेशनरी आदि सामान की है, जिसे अश्वनी कुमार (निवासी गांव कोडरा, तहसील बंगाणा, जिला ऊना) नामक व्यक्ति चलाता है। जब दोनों बहनें दुकान पर पेन व कॉपी लेने गईं और उन्होंने दुकानदार अश्वनी से पेन मांगा, तो उसने यह बहाना बनाया कि पेन उसके पास नहीं है और उन्हें दुकान के अंदर से खुद पेन ले लेने को कहा। जब पीड़िता और उसकी बहन दुकान से बाहर निकलने लगीं, तभी अचानक दुकानदार अश्वनी कुमार ने पीड़िता पल्लवी का हाथ पकड़ लिया और उसे जबरन खींचकर दुकान के साथ बने कमरे में ले गया तथा तुरंत अंदर से कमरे की कुंडी लगा दी। कमरे के अंदर सोफा पड़ा हुआ था, जहां आरोपी ने पीड़िता को जोर से धक्का दिया जिससे वह सोफे पर गिर पड़ी, और फिर आरोपी ने उसे सोफे पर जबरन लिटा दिया। इसके बाद आरोपी ने स्वयं अपने कपड़े उतार दिए और पीड़िता को जान से मारने की सीधी धमकी देते हुए कहा कि यदि उसने शोर मचाया तो वह उसे खत्म कर देगा। इस भयानक खौफ और दबाव के चलते आरोपी ने पीड़िता के सारे कपड़े जबरदस्ती उतार दिए और उसके साथ घोर दुष्कर्म (गलत काम) किया। दुष्कर्म करने के उपरांत भी आरोपी शांत नहीं हुआ और लगभग 20 मिनट तक पीड़िता के साथ गंभीर अश्लील हरकतें करता रहा। पीड़िता के बयान के अनुसार, इस वारदात से पहले भी आरोपी कई बार उसके साथ छेड़छाड़ और अश्लील हरकतें कर चुका था, परंतु लोक-लाज, भय और आरोपी की धमकी के डर से पीड़िता ने यह बात अपने परिजनों को नहीं बताई थी। इसी दौरान बाहर अकेली खड़ी छोटी बहन प्रियंका जब काफी देर होने पर घबरा गई और उसने लगभग 20-25 मिनट बाद कमरे का दरवाजा खटखटाया, तब जाकर आरोपी अश्वनी ने कमरे की कुंडी खोली और पीड़िता रोते हुए बाहर निकल सकी। इसके बाद पीड़िता की छोटी बहन ने पूरी हिम्मत जुटाकर स्कूल में लगी शिकायत पेटी में एक शिकायत-पत्र डाला, जिसमें उसने साफ लिखा कि अश्वनी दुकानदार उसकी बहन को फ्री में चॉकलेट देता है और एक दिन उसे अपने कमरे में भी ले गया था। जब स्कूल के अध्यापकों ने शिकायत पेटी खोलकर इस पत्र को पढ़ा, तब शिक्षिका (मैडम) ने पीड़िता को अपने पास बुलाकर पूरी बात पूछी, जिस पर पीड़िता ने रोते हुए अपनी आपबीती शिक्षिका को बताई और घर जाकर अपनी माता को भी सारी आपबीती सुनाई। इस जघन्य घटना के बाद से पीड़िता अत्यधिक मानसिक सदमे और गहरे अवसाद में है, उसका स्कूल जाने का मन भी नहीं कर रहा है क्योंकि उसे लगातार डर सता रहा है कि आरोपी दोबारा उसे डरा-धमका कर गंदा काम कर सकता है। पीड़िता ने अपने माता-पिता के साथ थाना बंगाणा पहुंचकर धारा 173 BNSS के तहत अपना औपचारिक बयान दर्ज कराया, जिसके आधार पर पुलिस ने आरोपी दुकानदार अश्वनी कुमार के विरुद्ध बीएनएस की धारा 64, 351(2), 127(2) तथा पॉक्सो अधिनियम (POCSO Act) की धारा 4 के अंतर्गत अभियोग पंजीकृत कर कानूनी कार्रवाई अमल में लाई।
आरोपी अश्वनी कुमार सेना (Army) से एक रिटायर्ड फौजी है और साथ ही पंचायत सेक्रेटरी पद से भी सेवानिवृत्त है तथा वर्तमान में मौजूदा वार्ड पंच के पद पर भी काबिज है, जिसके चलते इलाके में उसका काफी रसूख और प्रभाव है। वह इससे पूर्व भी ऐसी घिनौनी वारदातों को अंजाम दे चुका है तथा आदतन दलित बच्चियों के साथ छेड़छाड़ जैसी हरकतों में संलिप्त रहा है। इससे पहले भी पीड़िता के ही गांव से अनुसूचित जाति (कोली समाज) की एक लड़की सहित दो अन्य दलित बच्चियों के साथ उसने छेड़छाड़ की थी, किंतु अपने पद, रसूख, पैसे के बल और जान से मारने की धमकियां देकर वह उन मामलों को रफा-दफा कर दबा चुका है, जिसके कारण भयभीत पीड़ित परिवारों द्वारा उस समय कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जा सकी थी। इसी बेखौफ और विकृत मानसिकता के चलते आरोपी ने इस बार पल्लवी के साथ इस जघन्य घटना को अंजाम दिया। वारदात के बाद भी आरोपी ने अपनी पुरानी फितरत के अनुसार पीड़िता के पिता विजय कुमार और पीड़ित परिवार पर राजीनामा (समझौता) करने के लिए भारी दबाव बनाया, पैसे का प्रलोभन दिया और उन्हें लगातार प्रेशराइज किया। इसके अलावा, पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर में इतने गंभीर मामले और स्पष्ट जातिगत पृष्ठभूमि के बावजूद अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (SC/ST Act) की धाराएं शामिल नहीं की गई हैं, जिसे जोड़ने के लिए पीड़ित परिवार की ओर से पुलिस प्रशासन को एक औपचारिक लिखित प्रार्थना-पत्र सौंपकर सख्त कानूनी कार्रवाई और न्याय की मांग की गई है।
My name is Devappa Talawar, aged 38 years. I am a resident of Shakhapur village, Shorapur Taluk, Yadgir District, Karnataka. I earn my livelihood by working as a daily-wage labourer. In our village, certain traditional practices have been followed for many years in connection with funerals. According to these practices, when a person belonging to the Holeya community dies, members of a particular community are expected to dig the burial pit, while Madiga community members are expected to play the traditional drum (tamate) during the funeral. These practices have been followed in the village as customary rules for a long time. Recently, a young woman belonging to the Valmiki community from our village passed away. I was asked to come and dig the burial pit for her funeral. However, I refused to participate in the activity. Following my refusal, two days later, some village leaders and members of the dominant/upper-caste community allegedly came together and assaulted me. They also imposed a social boycott/exclusion on me because I had refused to follow the customary practice. I did not agree to the social boycott imposed against me. The following day, while I was at my home, some of the same persons came to my house and called me outside. When I came outside, they allegedly assaulted me. When my family members came out of the house after hearing the commotion and tried to find out what was happening, they were also assaulted by the accused persons at different places on their bodies. The incident caused fear and distress to me and my family. I believe that I was targeted and assaulted because I refused to follow the traditional caste-based practice imposed by certain people in the village. The social boycott and physical assault have affected my family's safety, dignity, and ability to live peacefully in the village. I request the concerned authorities to take appropriate legal action against the persons responsible for the assault, social boycott, and intimidation, and to ensure the safety and protection of my family.
Incident at Belegere Village, Channagiri Taluk, Davanagere District On 31 August 2026, a religious ritual known as “Ajji Pooja” was being conducted in Belegere village, Channagiri Taluk, Davanagere District. According to the information gathered, Scheduled Caste (Dalit) persons had traditionally been prevented from participating in this particular religious ceremony and were also not permitted to enter the temple premises. On the night of the incident, some young men belonging to a Scheduled Caste family from the same village participated in the Ajji Pooja and entered the temple premises. When some members of the dominant-caste community allegedly noticed them entering the temple, they objected to their presence and allegedly used caste-based abusive and derogatory language against the young men. The accused persons allegedly questioned the young men about how they had the courage to enter the temple and stated that persons belonging to their caste were not permitted to enter the temple. It is further alleged that some persons belonging to the Kuruba community restrained the young men who had entered the temple, tied them to a temple pillar, and assaulted them with wooden sticks, stones and other objects. The incident allegedly resulted in injuries to the victims. A case was registered with the police on the following day in connection with the incident. The allegations indicate that the incident involved caste-based discrimination, denial of access to a place of worship, caste-based verbal abuse, unlawful restraint, and physical assault. The incident therefore requires proper investigation, including examination of the circumstances surrounding the temple-entry restriction, the alleged caste-based abuse, the assault, the injuries sustained by the victims, and the applicable provisions of law