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यह घटना जिला सिरमौर की तहसील पच्छाद के गांव मेहली के साथ बने नैना देवी मंदिर की है, जहां जल शक्ति विभाग (IPH) में कार्यरत 57 वर्षीय चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी (चपड़ासी/पंप ऑपरेटर) श्री बालाराम (सुपुत्र स्वर्गीय श्री नानकु राम, निवासी ग्राम मेहली, डाकघर नैना टिक्कर) के साथ मंदिर के पुजारी विक्रम ठाकुर (सुपुत्र श्री जोगिन्दर सिंह, निवासी ग्राम जुडव, डाकघर नैना टिक्कर) द्वारा गंभीर जातिगत दुर्व्यवहार, गाली-गलौज और प्राणघातक हमला किया गया। 29 अगस्त को विभागीय आदेशानुसार जल शक्ति विभाग के पानी के टैंक की सफाई का कार्य चल रहा था, जिसमें बालाराम जी अपने विभागीय सहकर्मियों हरीश ठाकुर और सुनील दत्त के साथ मौके पर तैनात थे। दोपहर करीब 12:00 से 12:15 बजे के बीच, जब वे सरकारी कार्य के तहत टैंक की सफाई कर रहे थे, तभी वहां मौजूद मंदिर के तथाकथित पुजारी विक्रम ठाकुर ने उन्हें देखते ही हीन भावना व जातिगत दुर्भावना के चलते भद्दी-भद्दी गालियां देना शुरू कर दिया। उसने अनुसूचित जाति से ताल्लुक रखने वाले बालाराम और सुनील के खिलाफ अपमानजनक व जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए कहा, "तू चमार तू यहां पर किसने बुलाया,तुझे तो मैं आज जान से मार दूंगा और काट के जोहड़ में फेंक दूंगा"। कर्मचारियों ने शांति बनाए रखने का प्रयास किया और अपने काम में लगे रहे, लेकिन कुछ ही मिनटों बाद जब बालाराम टैंक के स्लैब पर सफाई कर रहे थे, तभी आरोपी विक्रम ठाकुर ने पीछे से आकर उनके सिर पर जानलेवा नीयत से एक मोटे डंडे से अचानक जोरदार प्रहार कर दिया। इस हमले के कारण बालाराम सीधे नीचे गड्ढे में जा गिरे और उनके सिर से भारी मात्रा में खून बहने लगा। यदि मौके पर मौजूद हरीश ठाकुर और सुनील दत्त तुरंत बीच-बचाव कर हमलावर को न पकड़ते, तो वह दूसरा वार कर बालाराम की जान ही ले लेता। इस पूरे घटनाक्रम की प्रत्यक्षदर्शी पास में ही पशु चरा रही गांव की एक महिला श्रीमती सत्या देवी (पत्नी श्री सीता राम) भी थीं।
इस अत्यंत गंभीर और जानलेवा घटना में पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली बेहद लचर, पक्षपातपूर्ण और घोर चिंताजनक रही है। दोपहर लगभग 12:00 बजे सिर पर गंभीर चोट लगने और अत्यधिक रक्तस्राव होने के बावजूद पीड़ित बालाराम का प्राथमिक उपचार और मेडिकल परीक्षण शाम को करीब सवा 6 बजे जाकर कराया गया। लगभग 6-7 घंटे तक घायल पीड़ित को बिना किसी त्वरित चिकित्सीय सहायता और एफआईआर के थाने में बैठाए रखा गया। इसके अलावा, पच्छाद पुलिस थाना द्वारा दर्ज की गई एफआईआर में भी भारी लापरवाही बरती गई है। सरकारी ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी पर पीछे से सिर जैसे नाजुक अंग पर जानलेवा हमला किए जाने और खुलेआम जान से मारने की धमकी देने के स्पष्ट साक्ष्य होने के बावजूद पुलिस ने आरोपी पर हत्या के प्रयास (Attempt to Murder) जैसी गंभीर धाराएं नहीं लगाईं। साथ ही, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (SC/ST Act) के तहत जो सख्त व उचित धाराएं लगनी चाहिए थीं, उन्हें भी नजरअंदाज कर दिया गया और मामले को कमजोर करने का प्रयास किया गया। घटना के समय आरोपी के हाथों में दराट (तेजधार हथियार) होने और पहले भी ग्रामीणों व महिलाओं के साथ उसके द्वारा की गई बदसलूकी के इतिहास के बावजूद पुलिस की यह ढिलाई और विलंब कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। इस प्रकरण में उच्चाधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप कर मामले में धाराएं बढ़ाने, आरोपी की त्वरित गिरफ्तारी करने और पीड़ित को उचित मुआवजा व न्याय दिलाने की सख्त आवश्यकता है।
यह घटना जिला ऊना (हिमाचल प्रदेश) की तहसील घनारी के गाँव कुठेड़ा जसवालां की है। इस गाँव में दलित समाज (अनुसूचित जाति) में से चमार जाति से ताल्लुक रखने वाला सुरेश कुमार सुपुत्र स्वर्गीय श्री देवराज रहता है, जो कि खेती-बाड़ी का काम करता है और जिसकी उम्र करीब 40 वर्ष है। घटनाक्रम के अनुसार, दिनांक 07/08/2026 को समय करीब शाम 6:00 से 6:15 बजे के बीच सुरेश कुमार जब अपने घर से दुकान की तरफ जा रहा था, तब गाँव कुठेड़ा जसवालां स्थित सत्संग चौक के नजदीक सराय के पास पहुँचा। वहाँ पहले से मौजूद वर्तमान प्रधान रविन्द्र कुमार उर्फ रवि पुत्र स्वर्गीय श्री सीता राम (उम्र करीब 41 वर्ष, निवासी वार्ड नम्बर 4, गाँव कुठेड़ा जसवालां, तहसील घनारी) और उनके साथ उप-प्रधान भी मौके पर खड़े थे। सुरेश कुमार को देखकर रविन्द्र कुमार उर्फ रवि ने शराब के नशे में उसे जातिसूचक शब्द बोलते हुए ललकारा और कहा कि "चमार रुक"। जब सुरेश कुमार रुक गया, तो आरोपी रविन्द्र कुमार ने उसकी मोटरसाइकिल/बाइक की चाबी निकाल ली और गाली-गलौज करते हुए कहा कि "चमार तुझे आज मैं नहीं छोड़ूंगा, तुझे जान से मार दूँगा"। इसके बाद आरोपी ने सुरेश कुमार को गले से पकड़ लिया, उसके साथ मारपीट व धक्का-मुक्की शुरू कर दी तथा उसकी कमीज (टी-शर्ट) फाड़ दी। इसी दौरान मौके पर मौजूद गवाह पंकज कुमार सुपुत्र श्री रछपाल सिंह (निवासी वार्ड नं. 7, कुठेड़ा जसवालां) तथा दिलबाग सिंह ने यह सारा वाकया अपनी आँखों से देखा और बीच-बचाव किया। गवाहों की मदद से सुरेश कुमार किसी तरह आरोपी के चंगुल से छूटकर अपनी जान बचाकर वहाँ से निकला, जबकि आरोपी जाते-जाते भी उसे यह धमकी देता रहा कि “चमारा आज तू बच गया है, आगे को तुझे छोड़ूँगा नहीं" । इसके उपरांत पीड़ित सुरेश कुमार ने थाना गगरेट, जिला ऊना में उपस्थित होकर आरोपी रविन्द्र कुमार उर्फ रवि के खिलाफ लिखित शिकायत पत्र प्रस्तुत किया। इस शिकायत के आधार पर पुलिस थाना गगरेट द्वारा दिनांक 08/08/2026 को समय 04:08 बजे शाम को अभियोग संख्या 80/2026 धारा 115(2), 351(2) भारतीय न्याय संहिता (BNS) तथा धारा 3(1)(r), 3(1)(s) अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (SC & ST Act) के तहत मामला पंजीकृत किया गया। एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस द्वारा पीड़ित का मेडिकल करवाने हेतु सीएचसी गगरेट भेजा गया और उच्चाधिकारियों को सूचित किया गया। लेकिन इतना होने के बाद अभी भी दोषी द्वारा धमकियां दी जा रही है और जान माल का खतरा बना हुआ है.
यह घटना हिमाचल प्रदेश के जिला ऊना की तहसील हरोली के अंतर्गत पड़ते गांव लोअर बढ़ेड़ा की है, जो जिला मुख्यालय ऊना से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस गांव के निवासी 15 वर्षीय नाबालिग दलित छात्र अवतार दास सपुत्र रमेश मेशी रहता है जो कि कक्षा 10वीं, आर्यन पब्लिक स्कूल, लोअर बढ़ेड़ा में पढता है. अवतार दास साथ हुई शृंखलाबद्ध उत्पीड़न, जातिसूचक गाली-गलौज, मारपीट और जान से मारने की धमकियों का पूरा घटनाक्रम 17 अगस्त 2026 से शुरू होता है। 17 अगस्त 2026 को स्कूल में मध्याह्न अवकाश (हाफ टाइम) के दौरान अवतार दास के सहपाठी अक्षय राणा (पुत्र जसबीर सिंह) ने उसे अपने टिफिन से करेले की सब्जी खाने को कहा, जिसे अवतार द्वारा मना करने पर दोनों ने आपसी सहमति से अपनी रोटियाँ पक्षियों को डाल दीं; परंतु कुछ ही देर बाद अक्षय राणा अकारण ही क्रोधित हो गया और अवतार को "तू अपने आप को बहुत बड़ा समझता है" कहते हुए गाली-गलौज व हाथापाई करने लगा, जिसकी जानकारी अवतार ने शाम को घर लौटकर अपने परिजनों को दी। इसके अगले दिन, यानी 18 अगस्त 2026 को शाम लगभग 6:00 बजे, जब अवतार डेरा बाबा मंगल दास जी के पास स्थित अपने मित्र अतुल के घर गया हुआ था, तब अक्षय राणा का पिता जसबीर सिंह (पुत्र सुरजीत सिंह) अचानक वहाँ अंदर घुस आया और उसने अवतार को जातिसूचक शब्द कहते हुए थप्पड़ों व कोहनी से बेरहमी से पीटा तथा जान से मारने की धमकी देकर चला गया। इस हिंसा के बाद अवतार ने रात करीब 8:30 बजे 100 नंबर पर पुलिस को सूचित किया और थाना हरोली से मेडिकल परीक्षण के लिए कॉल भी आई, परंतु स्थानीय पंचायत प्रधान के यह कहकर समझाने पर कि मामला छोटा है और इसे आपस में सुलझा लिया जाएगा, परिजनों ने उस समय बालक का मेडिकल नहीं करवाया। तत्पश्चात, 24 अगस्त 2026 को रात लगभग 9:30 बजे, जब अवतार अपने दो दोस्तों के साथ बाज़ार से घर लौट रहा था, तो आरोपी जसबीर सिंह ने शराब के नशे में धुत्त होकर रास्ते में उनका मार्ग रोका, पुनः गाली-गलौज की और मारपीट शुरू कर दी, जिसे अवतार के दोस्तों ने बीच-बचाव करके छुड़वाया। इस घटना के अगले ही दिन, आरोपी जसबीर सिंह ने अपने प्रभाव का दुरुपयोग करते हुए 15 वर्षीय पीड़ित छात्र के खिलाफ ही थाना हरोली में मारपीट की एक झूठी शिकायत दर्ज करवा दी। इसके साथ ही आरोपी द्वारा लगातार जान से मारने की धमकियाँ दी जाने लगीं, जिससे अत्यधिक भयभीत होकर नाबालिग छात्र ने स्कूल जाना और अपने घर से बाहर निकलना पूरी तरह बंद कर दिया है। अंततः, इस पूरे घटनाक्रम और लगातार हो रहे मानसिक व शारीरिक उत्पीड़न से तंग आकर पीड़ित छात्र ने 29 अगस्त 2026 को पुलिस अधीक्षक, ऊना को लिखित आवेदन देकर निष्पक्ष जांच कराने, आरोपी जसबीर सिंह के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम तथा बाल संरक्षण/जुवेनाइल से संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने और पीड़ित परिवार को सुरक्षा प्रदान करने की मांग की।
The incident took place in Devkuliya village, under the jurisdiction of Phenhara police station in Bihar. The victim, Reeta Devi—wife of Prabhu Ram and a member of the Scheduled Caste—is a very poor and simple person.The accused in the case—Shankar Raut, Anish Raut, Chhala Devi, and Suman Devi—reside in thictim's neighborhood. They belong to a backward caste. Knowing that the victim belongs to a Scheduled Caste, they frequently subject her to discrimination and caste-based mistreatment; her husband often remains away from home in search of livelihood. The accused Anish Raut also looks at her with malicious intent. Whenever the victim protests this behavior, she is subjected to abuse. Due to these circumstances, on August 5, 2026, all the aforementioned accused arrived armed with sticks, clubs, and iron rods; finding the victim alone, they hurled severe verbal abuse at her. When she resisted, they grabbed her by the hair and slammed her to the ground. They assaulted her and attempted to kill her by striking her on the forehead with an iron rod, causing a severe head injury. In this regard, Case No. 183/26 was registered against the accused at Phenhara Police Station on August 7, 2026.
Vishu@Biru and accused Vansh gangster having firgt on social media. The confrontatio between Biru and shooter identified as revolved around claims of " Karnal ka Baap kaun". Vansh took the responsblity of Biru Murder case.