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अनुसूचित जाति विकास योजना (SCDP) में भेदभाव at Bhota

    हमीरपुर जिले की भोरंज तहसील के अंतर्गत ग्राम बल्ह बुलेट डाकघर टाउन भरारी में दलित समुदाय के प्रति सामाजिक अन्याय और सरकारी संसाधनों के पक्षपातपूर्ण उपयोग का एक हृदयविदारक मामला सामने आया है। इस पूरे संघर्ष के केंद्र में राजेंद्र कुमार हैं, जो 57 वर्षीय मजदूर हैं और स्वर्गीय श्री फितू राम के पुत्र हैं। राजेंद्र कुमार और उनके साथ गाँव के चमार जाति के कुल 10 परिवार पिछले कई वर्षों से बुनियादी मानवाधिकार 'सड़क' के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इस घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब अनुसूचित जाति विकास योजना (SCDP) के तहत इस बस्ती को मुख्य मार्ग से जोड़ने के लिए 87 लाख रुपये का बजट स्वीकृत किया गया। 7 जुलाई 2021 को तत्कालीन विधायक कमलेश कुमारी द्वारा बड़ी उम्मीदों के साथ इस सड़क का भूमि पूजन किया गया था, ताकि दलित समुदाय के इन 10 परिवारों का जीवन सुगम हो सके।


    सड़क निर्माण की प्रक्रिया शुरू करने के लिए स्थानीय ग्राम सुधार सभा और दलित समुदाय के लोगों ने स्वयं पहल की थी। इन परिवारों ने चंदा इकट्ठा किया और अपनी सीमित जमापूँजी खर्च करके भोटा-लदरौर हाईवे से गाँव तक कच्ची सड़क का निर्माण किया। इस नेक कार्य के लिए दलित परिवारों ने बड़े त्याग किए; सड़क का रास्ता निकालने के लिए कई परिवारों को अपने पुराने मकानों के हिस्सों और दीवारों को तोड़ना पड़ा। इतना ही नहीं, जो पक्का पैदल रास्ता (खंड़जा) पहले पंचायत द्वारा बनाया गया था और जिससे लोग आते-जाते थे, विभाग ने नई सड़क बनाने के नाम पर उस सुरक्षित रास्ते को भी उखाड़ दिया। ग्रामीणों ने इस उम्मीद में यह सब सहा कि जल्द ही उनके घर तक एम्बुलेंस और गाड़ियाँ पहुँच सकेंगी।


    परंतु, जैसे ही लोक निर्माण विभाग ने कार्य शुरू किया, प्रशासनिक और सामाजिक भेदभाव की दीवारें खड़ी हो गईं। विभाग ने स्वीकृत 40 लाख में से 30 लाख रुपये की मोटी राशि खर्च कर दी, लेकिन यह सड़क केवल सामान्य वर्ग (ब्राह्मण समुदाय) की बस्ती और उनके घरों तक ही बनाई गई। जैसे ही सड़क का निर्माण दलित परिवारों के 10 घरों की ओर बढ़ने लगा, निजी भूमि का विवाद खड़ा कर दिया गया। आरोप है कि प्रभावशाली वर्ग ने अपने हिस्से की सड़क तो बनवा ली, लेकिन दलितों के घरों तक जाने वाले रास्ते पर अड़ंगा लगा दिया। विभाग के अधिकारियों, जिनमें एसडीएम भोरंज शशिपाल शर्मा और अधिशाषी अभियंता केके भारद्वाज शामिल हैं, ने मौके का निरीक्षण तो किया, लेकिन कोई ठोस समाधान निकालने के बजाय मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया।


    आज स्थिति यह है कि पुराना पक्का रास्ता उखाड़े जाने और नई सड़क अधूरी रहने के कारण यहाँ का धरातल पूरी तरह दलदल में तब्दील हो चुका है। बरसात के मौसम में इन 10 परिवारों का जीना दूभर हो जाता है। कीचड़ और फिसलन के कारण पैदल चलना भी जानलेवा हो गया है। सबसे दुखद स्थिति तब होती है जब कोई बुजुर्ग, गर्भवती महिला या बच्चा बीमार पड़ता है। गाँव में सड़क न होने के कारण मरीजों को आज भी चारपाई पर लिटाकर और कंधे पर उठाकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है। 21वीं सदी में इस तरह की अमानवीय स्थिति सीधे तौर पर प्रशासन की विफलता और जातिगत भेदभाव को दर्शाती है।


    वर्तमान में, राजेंद्र कुमार और अन्य पीड़ित परिवारों का सब्र का बाँध टूट चुका है। उन्होंने प्रशासन को दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि उनके घरों तक सड़क का निर्माण तुरंत पूरा नहीं किया गया, तो वे उस सड़क को भी बंद कर देंगे जो उनकी निजी भूमि से होकर गुजरती है और जिसे उन्होंने लोक निर्माण विभाग को सौंपा था। यह मामला न केवल सरकारी धन (30 लाख रुपये) के दुरुपयोग का है, बल्कि एक विशिष्ट समुदाय को जानबूझकर विकास की मुख्यधारा से वंचित रखने का एक गंभीर मामला है।

  • Posted by: NCDHR- NDMJ, Himachal Pradesh
  • Fact finding date: 10-04-2026
  • Date of Case Upload: 13-04-2026

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दलित छात्रा के साथ जातिय भेदभाव, रैगिंग व छेड़छाड़ छात्रा की हुई मौत Tapovan

     


                                          यह घटना तहसील धर्मशाला के गांव रसां तपोवन  की है। इस गांव में पल्लवी केस का घटनाक्रम एक अत्यंत दुखद और जटिल कानूनी मामला है, जो शिक्षण संस्थानों में रैगिंग, यौन उत्पीड़न और प्रशासनिक विफलता के गंभीर पहलुओं को उजागर करता है। इस पूरी त्रासदी की शुरुआत 18 सितंबर 2025 को धर्मशाला सरकारी डिग्री कॉलेज के परिसर में हुई, जहाँ बीए प्रथम वर्ष की छात्रा पल्लवी के साथ उसकी तीन सीनियर छात्राओं—हर्षिता, आकृति और कोमोलिका—द्वारा कथित तौर पर मारपीट और मानसिक प्रताड़ना (रैगिंग) की गई। इस घटना ने पल्लवी को गहरे मानसिक आघात में डाल दिया, लेकिन मामला तब और भी गंभीर हो गया जब पल्लवी ने अपनी मृत्यु से पूर्व साझा किए गए बयानों और वीडियो में कॉलेज के प्रोफेसर अशोक कुमार पर यौन उत्पीड़न और अनुचित स्पर्श (बैड टच) के आरोप लगाए। पल्लवी के अनुसार, जब उसने रैगिंग की शिकायत करने का प्रयास किया, तो उसे न्याय दिलाने के बजाय प्रोफेसर द्वारा प्रताड़ित किया गया, जिससे वह गहरे अवसाद (डिप्रेशन) और ट्रॉमा में चली गई। अगले तीन महीनों तक पल्लवी की स्थिति लगातार बिगड़ती रही; उसे पहले धर्मशाला के जोनल अस्पताल और फिर टांडा मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, जहाँ उसके अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। अंततः, 26 दिसंबर 2025 को लुधियाना के डीएमसी अस्पताल में उसने अंतिम सांस ली। पल्लवी की मृत्यु के बाद जन आक्रोश भड़क उठा और धर्मशाला सहित पूरे हिमाचल प्रदेश में "जस्टिस फॉर पल्लवी" की मांग को लेकर बड़े पैमाने पर कैंडल मार्च और विरोध प्रदर्शन हुए। पुलिस ने प्रोफेसर और तीनों छात्राओं के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं और हिमाचल प्रदेश रैगिंग निषेध अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की। इस मामले में हिमाचल प्रदेश अनुसूचित जाति आयोग ने भी हस्तक्षेप किया, क्योंकि पल्लवी एक दलित परिवार से थी और आरोपों में जातिगत भेदभाव के संकेत भी मिले थे। वर्तमान में यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है. पल्लवी के दोषियों के खिलाफ अभी तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई है. पुलिस का रवैया पूरी तरह से भेदभावपूर्ण और संवेदनहीन है। वे दोषियों को बचाने का प्रयास कर रहे हैं और पीड़ित परिवार पर ही दबाव बना रहे हैं।

  • Posted by: NCDHR- NDMJ, Himachal Pradesh
  • Fact finding date: 01-03-2026
  • Date of Case Upload: 10-04-2026

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दलित का शव जबरन शमशान घाट के बाहर जलवाना Basatar

                                                                 यह घटना तहसील बंगाणा के गांव बसातर की है। इस गांव में दिनाक 29 दिसम्बर को तहसील बंगाणा में पड़ते गांव बसातर में कबीर पंथी समाज में से वीरबल सिंह की मौत हो गई जिसकी उम्र करीब 71 वर्ष की थी. गांव बसातर में सरकारी ज़मीन पर सरकार द्वारा सार्वजनिक तौर पर एक शमशान घाट बनाया गया है. लेकिन वीरबल सिंह के शव को शमशान घाट पर ले जाने से पहले ही लकड़ियों की चिता को शमशान घाट के बाहर ही बना दिया गया जब कुछ लोगो द्वारा चिता को शमशान घाट के अन्दर बनी शैड में लगाने को कहा गया तो अपशगुन का बहाना लगा कर चिता को बाहर ही लगाया गया और शव को बाहर ही जला दिया गया इससे पहले भी दलित परिवार से प्रकाश चन्द के शव को बरसात में शमशान घाट के बाहर ही जलाया गया जबकि गैर दलित समाज के शवों को शमशान घाट के शैड में ही जलाया जाता है. गांव बसातर का यह शमशान घाट सार्वजनिक तौर पर है और सरकार की ज़मीन पर सरकारी पैसे से बना हुआ है। शासन प्रसाशन इस घटना पर कडा संज्ञान ले. इतना ही नहीं पंचायत द्वारा पीड़ित परिवार की ज़मीन बिना किसी अनुमति जबरन रोड बना दिया है और रोड का सारा पानी पीड़ित के मकान के पीछे छोड़ दिया गया है जिस कारण पीड़ित का सारा मकान बैठ गया है.


     

  • Posted by: NCDHR- NDMJ, Himachal Pradesh
  • Fact finding date: Not recorded
  • Date of Case Upload: 10-04-2026

दलित महिला के साथ सामूहिक बलात्कार व ह्त्या at Sainj Kullu

                                                                 यह घटना तहसील बंगाणा के गांव कोलका (रायेपुर मैदान) की है। इस गांव में यह अत्यंत दुखद और जघन्य घटना हिमाचल प्रदेश के जिला कुल्लू की सैंज घाटी की है, जहाँ एक दलित महिला युवावंती, जो समाज में स्वावलंबन की मिसाल पेश करते हुए अपने घर से लगभग दो-तीन किलोमीटर दूर दयोली गांव में अपना एक सिलाई केंद्र (Boutique) चलाती थीं, इस क्रूरता का शिकार हुईं। युवावंती रोज की तरह अपने सिलाई केंद्र पर काम खत्म करने के बाद शाम को पैदल ही जंगल के रास्ते से अपने घर लौट रही थीं, लेकिन उस दिन वह घर नहीं पहुँचीं। उनके पति रतिराम, जो एक दिहाड़ी मजदूर हैं, जब उनकी राह तकते-तकते थक गए और चिंता बढ़ी, तो उन्होंने ग्रामीणों के साथ मिलकर उस रास्ते पर खोजबीन शुरू की जहाँ से वह रोज गुजरती थीं। काफी तलाश के बाद जंगल के एकांत क्षेत्र में युवावंती का शव एक पेड़ से लटका हुआ मिला, जिसे देख पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। दरअसल, अपराधियों ने घात लगाकर उन्हें रास्ते में रोका, उनके साथ सामूहिक बलात्कार जैसी हैवानियत को अंजाम दिया और फिर उनकी नृशंस हत्या कर दी; साक्ष्य मिटाने और मामले को आत्महत्या का रूप देने के लिए उनके शव को पेड़ से टांग दिया गया था। रतिराम के अनुसार, उनकी पत्नी एक मेहनती महिला थीं जो अपने सिलाई के काम से परिवार की मदद कर रही थीं, लेकिन अपराधियों ने उनके इस संघर्षपूर्ण जीवन का अंत कर दिया। इस मामले में पुलिस जांच के दौरान पवन कुमार और संजय कुमार जैसे स्थानीय व्यक्तियों के नाम मुख्य दोषियों के रूप में सामने आए, जिन्हें बाद में गिरफ्तार भी किया गया। घटना के बाद स्थानीय लोगों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ कड़ा रोष प्रकट किया क्योंकि शुरुआत में मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया था। रतिराम जैसे एक साधारण मजदूर के लिए अपनी पत्नी के साथ हुई इस भयानक घटना की पूरी जानकारी दे पाना मानसिक रूप से बहुत कष्टदायक है, क्योंकि इस रास्ते पर गुजरते हुए आज भी उन्हें वह खौफनाक मंजर याद आता होगा। वर्तमान में यह मामला दलित उत्पीड़न और महिलाओं के खिलाफ हिंसा का एक गंभीर उदाहरण बन चुका है, जिसमें उचित कानूनी पैरवी और रतिराम को सुरक्षा प्रदान करना अत्यंत आवश्यक है ताकि आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा मिल सके।


     

  • Posted by: NCDHR- NDMJ, Himachal Pradesh
  • Fact finding date: 14-12-2025
  • Date of Case Upload: 10-04-2026

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अंतरजातिय शादी के चलते दलित महिला के साथ जातिय भेदभाव at Majaara Sanoli

                                यह घटना जिला ऊना की पंचायत मजारा की है यह गांव जिला मुख्यालय से 20 कि०मी० दुरी पर है. इसी गांव में  लितिका पत्नी श्री संजीव कुमार रहती है. उसकी उम्र 33 वर्ष की है. उसकी एक बेटी और एक बेटा है, वह अनुसूचित जाति में से जुलाहा जाति से सम्बन्धित है,  वह निम्न पते की स्थाई निवासी है गांव मजारा डाकघर सनोली तहसील व जिला ऊना हि०प्र०.


                दिनाक 14 फरवरी 2011 को लितिका देवी की शादी संजीव कुमार स्पुत्र कश्मीरी लाल जाति ब्राहमण गांव मजारा डाकघर सनोली तहसील व जिला ऊना हि०प्र०. से हुई है उसके  पति चंडीगढ में मैस (कैंटीन) चलाते है. लितिका का पति संजीव कुमार पहले शादी शुदा था और उसकी पहली शादी से एक बेटी है लितिका के पति की पहली पत्नी के साथ तलाक हुआ है उसके बाद ही उसने लितिका के साथ शादी करी है. शादी के बाद से ही लितिका उसका पति, बेटी और बेटा सब पूरा परिवार चंडीगढ़ में ही रहते है.


              गांव मजारा में लितिका देवी के पति की पैत्रिक ज़मीन है जिसमे उसके पति ने सन 2011-12 में अपना खुद का रहने लाइक मकान बनाया है, लितिका देवी के पति का बड़ा भाई जिसका नाम विजय कुमार है वह अपने परिवार सहित लितिका के पति के पैत्रिक बने बनाये मकान में रह रहा है लितिका की सास इनके साथ चंडीगढ़ में ही रहती थी और उसकी  सास का चंडीगढ़ PGI से इलाज़ हुआ उन्होंने उनकी पूरी सेवा की और चंडीगढ़ में ही उनका स्वर्गवास हुआ और चंडीगढ़ में ही उनका अंतिम संस्कार और रस्म पगड़ी किया. लितिका देवी की शादी के बाद बच्चों को छुट्टियां होने पर वे सब अपने मकान मजारा में आते व कई कई दिन रह कर जाते थे उस दोरान लितिका के ससुराल मजारा में जेठ व् इसके पुरे परिवार व अन्य किसी को भी लितिका देवी की जाति के बारे में पता नहीं था.


         पिछले वर्ष दिसम्बर महीने में कहीं ना कहीं से लितिका के जेठ व उसके परिवार को  पता चल गया की लितिका जुलाहा जाति से सम्बन्धित है. 30 दिसम्बर 2022 को लितिका देवी अपने बच्चों को स्कूल से छुट्टियाँ होने कारण अपने पति व् बच्चों सहित गांव मजारा में आई शाम करीब 5 बजे जैसे ही वे सब अपने घर पहुंचे तो इन्होने देखा की उनके मुख्य गेट पर व् सभी कमरों पर नये ताले लगे हुए हैं जब लितिका और उसके पति ने उन तालों को तोड़ा तो अन्दर देखा की बरामदे में पशुयों का सुखा चारा भरा पडा है. इतने में उसका जेठ व उसका पूरा परिवार जिसमे उसका जेठ विजय कुमार, जेठानी रीना कुमारी, उनकी बेटी पलक, व् लितिका का चाचा ससुर राम कुमार आये व लितिका व् उसके पति के साथ मारपीट करने लग गए और कहने लगे की इस कुत्ती चुहड़ी, साली जुलाही को घर से निकालो लितिका के पति को बोले ये कुत्ता कहाँ से इस गंद को शादी करके ले आया है. लितिका की जान से मारने की धमकी दी और कहा तेरे जैसे तो हमारे घरों में नौकर भी नहीं होते जुलाही गंद किस्से थां दी इसके उपरांत लितिका के परिवार पर पुलिस चौकी संतोषगढ़ से उसके जेठ ने पुलिस वालो को बुला लिया जिन्होंने झगड़ा ख़तम किया ओर चले गए. इसके बाद लितिका देवी द्वारा NDMJ टीम से संपर्क किया व् 13 जनवरी 2023 को टीम के सहयोग से दोषी गण के खिलाफ थाना में अनुसूचित जाति धारा सहित मामला दर्ज करवायाथा लेकिन दिनांक 10.07.24 को फिर लितिका अपने परिवार के साथ चण्डीगढ़ से आपने घर गांव मजारा आई तो घर का विजय कुमार व राम कुमार ने तालातोड़कर घर में पशु चारा लकड़ी कवाड इत्यादी रखकर घर के सारे हिस्सा में भी कब्जा कर लिया था जो सरा सर गल्त है. लितिका के साथ यह सब अनुसूचित जाति की होने की वजह से किया जा रहा है। इस घटना वावत भी थाना ऊना में दोषी गण के खिलाफ अनुसूचित जाति जन जाति अधिनियम धारा सहित मामला दर्ज करवाया है.  

  • Posted by: NCDHR- NDMJ, Himachal Pradesh
  • Fact finding date: 31-07-2024
  • Date of Case Upload: 10-04-2026

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